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Bahula Chaturthi 2023 : बहुला चौथ को ऐसे करें पूजन, मिलेगी बल, बुद्धि और विद्या

Bahula Chaturthi: भाद्रपक्ष माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को बहुला चौथ के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान गणेश और कृष्ण के साथ ही गायों की पूजा भी की जाती है.

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Edited By: Mohit Tiwari
Bahula Chaturthi 2023 : बहुला चौथ को ऐसे करें पूजन, मिलेगी बल, बुद्धि और विद्या

नई दिल्ली. भाद्रपक्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी मनाई जाती है. इस दिन इस दिन भगवान गणेश और कृष्ण के साथ ही गायों की पूजा भी की जाती है. बहुला चतुर्थी के दिन व्रत रखने और भगवान कृष्ण और गणेश जी की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही बल, बुद्धि और विद्या प्राप्त होती है. इसके अलावा यह व्रत करने वाले को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है. इस चतुर्थी को कृष्ण चतुर्थी और बहुला चौथ को नाम से भी जाना जाता है.

कब है बहुला चौथ 2023

साल 2023 में भाद्रपक्ष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 02 सितंबर की रात 08 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 03 सितंबर की शाम 06 बजकर 24 मिनट तक रहेगी. इसके साथ ही उदया तिथि 03 सितंबर को है. ऐसे में संकष्टी और बहुला चतुर्थी का व्रत 03 सितंबर 2023 रविवार के दिन रखा जाएगा.

बहुला चतुर्थी की पूजा विधि

1- बहुला चतुर्थी के दिन जल्दी सोकर उठना चाहिए. इसके बाद दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान करें.

2- इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें.

3- शाम के समय भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और गौ माता की उपासना करें.

4- पूजा के लिए भगवान श्रीकृष्ण के ऐसे चित्र या प्रतिमा को स्थापित करें, जिसमें उनके साथ गाय भी हो.

5- सबसे पहले भगवान को कुमकुम का तिलक लगाएं. इसके बाद उन्हें फूलों की माला अर्पित करें. इसके साथ ही शुद्ध घी का दीपक जलाएं और प्रभु को अबीर व गुलाल भी अर्पित करें.

6- भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की पूजा के बाद गाय सहित बछड़े का भी पूजन करें. इसके साथ ही व्रत कथा भी पढ़ें.

क्या है इसका महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपक्ष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन भगवान गणेश के साथ ही गौ माता की भी पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन गौ माता का पूजन और सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के साथ ही चंद्र देव का भी पूजन करने से जीवन में आ रहीं सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं.

बहुला चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को देखने के लिए कामधेनु गाय ने बहुला के रूप में नन्द बाबा की गौशाला में आईं. भगवान श्रीकृष्ण को यह गाय बहुत पसंद आने लगी, वे हमेशा उस गाय साथ समय बिताते थे. बहुला गाय का एक बछड़ा भी था, जब बहुला गाय चरने के लिए जाती तब वो उसको बहुत याद करता था. एक बार जब बहुला गाय चरने के लिए जंगल गई तो इस दौरान चरते-चरते बहुत आगे निकल गई, और एक शेर के पास जा पहुंची. शेर उसे देख खुश हो गया और अपना शिकार बनाने की सोचने लगा. इसको देखकर बहुला डर गई, और उसे अपने बछड़े का ख्याल आया. जैसे ही शेर उसकी ओर आगे बढ़ा, बहुला ने उससे बोला कि वो उसे अभी न खाए, घर में उसका बछड़ा भूखा है, वो उसे दूध पिलाकर वो वापस आ जाएगी, तब वो उसे अपना शिकार बना ले. शेर ने कहा कि मैं कैसे तुम्हारी इस बात पर विश्वास कर लूं, तो बहुला ने उसे विश्वास दिलाया और कसम खाई कि वो जरुर आएगी. इसके बाद बहुला वापस गौशाला जाकर बछड़े को दूध पिलाती है, और बछड़े को बहुत प्यार करने के बाद वह उसे गौशाला छोड़कर वापस जंगल में शेर के पास आ जाती है. शेर उसे देख हैरान हो जाता है. दरअसल, शेर के रूप में भगवान श्रीकृष्ण होते है, जो बहुला की परीक्षा लेने आते है. इसके बाद श्रीकृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ जाते है, और बहुला को कहते है कि मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हुआ, तुम परीक्षा में सफल हो गईं हो. समस्त मानव जाति द्वारा भाद्रपक्ष महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारी पूजा अर्चना की जाएगी और समस्त जाति तुमको गौमाता कहकर संबोधित करेगी व जो भी इस दिन व्रत रखेगा उसे सुख, समृद्धि, धन, ऐश्वर्य व संतान की प्राप्ति होगी.

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.