नई दिल्ली. मलमास का महीना साल 2023 में 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त दिन बुधवार तक रहेगा. इसको अधिकमास या परुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसके स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं. इस महीने का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस माह में भगवान विष्णु की अराधना और भागवत कथा का श्रवण करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है. मान्यता है इस महीने में किए गए कार्यों और पूजा पाठ का फल अधिक मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मलमास में इन कार्यों को करने से मिलता है लाभ
धर्म कर्म के कार्यों को मलमास में बेहद ही उपयोगी माना गया है. इस मास में भगवान श्रीकृष्ण और नरसिंह भगवान की कथाओं को सुनना, दान पुण्य करना चाहिए. इसके अलावा इस महीने में श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, राम कथा और गीता का अध्याय करना बेहद शुभ माना जाता है. इस महीने में सुबह शाम 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
करना चाहिए ऐसा भोजन
इस महीने में केवल एक ही समय भोजन करना चाहिए. इस मास में चावल, जौ, तिल, केला, दूध, दही, जीरा, सेंधा नमक, ककड़ी, गेहूं, बथुआ, मटर, पान, सुपारी, कटहल के अलावा मेथी आदि चीजों का सेवन करना लाभप्रद होता है. इसके साथ ही ब्राह्मण, गरीब और जरूरतमंद को भोजन कराना और दान देना काफी अच्छा माना जाता है.
दीपदान का है विशेष महत्व
इस महीने में दीपदान करने का विशेष महत्व होता है. इसके साथ ही इस महीने में ध्वजा का दान भी करना चाहिए. इस माह में दान पुण्य, सामाजिक और धार्मिक कार्य, वृक्ष लगाना आदि काम भी करने चाहिए.
कर सकते हैं ये काम
इस महीने में विवाह तय करने के साथ सगाई भी कर सकते हैं. भूमि या मकान खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा शुभ योग व मुहूर्त में खरीदारी कर सकते हैं.
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मलमास में भूलकर भी न करें ये काम
1- मलमास में मांस-मछली, शहद, मसूर की दाल, उड़द दाल, मूली, प्याज-लहसुन, नशीले पदार्थ, बासी खाना, राई आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
2- इस महीने में नामकरण, श्राद्ध, तिलक, मुंडन, कर्णछेदन, गृह प्रवेश, संन्यास, यज्ञ, दीक्षा लेना, देव प्रतिष्ठा, विवाह आदि शुभ व मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए.
3- इसके साथ ही घर, दुकान, वाहन, वस्त्र आदि की खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए.
4- इस महीने में क्रोध, गलत कार्य, चोरी, असत्य बोलना, गृहकलह, आदि काम नहीं करने चाहिए. इसके साथ ही तालाब, बोरिंग और कुंआ आदि का भी निर्माण नहीं कराना चाहिए.
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