नई दिल्ली: हर साल चैत्र नवरात्रि नए साल की शुरुआत का प्रतीक बनता है. मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस बार 19 मार्च गुरुवार से गंधस्थापना के साथ शुरुआत होगी और 27 मार्च शुक्रवार को सिद्धिदात्री की पूजा के साथ रामनवमी मनाई जाएगी. पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को समय पर इकट्ठा करना भक्तों की प्राथमिकता होती है, ताकि रोजाना की आरती और भोग बिना किसी रुकावट के चढ़ सके.
मां दुर्गा की तस्वीर या फोटो, पूजा चौकी, कलश (तांबे या मिट्टी का), आम के पत्ते, नारियल, मिट्टी का बर्तन, जौ के बीज और गंगाजल सबसे पहले जुटाएं. ये चीजें कलश स्थापना और रोजाना पूजा में मुख्य भूमिका निभाती हैं. इन्हें साफ-सुथरी जगह पर रखें.
माता को सजाने के लिए लाल चुनरी, सिंदूर, महावर, बिंदी, चूड़ियां, इत्र, काजल, मेहंदी, गजरा, नथ, बिछिया, पायल और कंघी जरूर रखें. ये सामग्री मां को सुंदर रूप में सजाने के लिए इस्तेमाल होती है और भक्ति भाव बढ़ाती है.
रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), फूल-मालाएं, अगरबत्ती, धूप, दीपक, घी या तेल, कपूर, पान, सुपारी, लौंग-इलायची, पंचमेवा और सूखा नारियल भी जरूरी हैं. मिठाई, फल और भोग के लिए तैयार रखें.
19 मार्च: मां शैलपुत्री
20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च: मां चंद्रघंटा
22 मार्च: मां कूष्मांडा
23 मार्च: मां स्कंदमाता
24 मार्च: मां कात्यायनी
25 मार्च: मां कालरात्रि
26 मार्च: मां महागौरी (अष्टमी)
27 मार्च: मां सिद्धिदात्री (रामनवमी).
रोज मां के अलग रूप की पूजा से विशेष फल मिलता है.
पूजा में लोबान, गुग्गल और माचिस भी रखें. मातरानी का ध्वज और आरती थाली तैयार रखें. सारी सामग्री पहले से चेक कर लें ताकि नौ दिनों की भक्ति निर्विघ्न चले. इससे मन को शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे.
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