नई दिल्ली: देशभर में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ चल रहा है. सनातन परंपरा में इन नौ दिनों को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष समय माना जाता है. मान्यता है कि माता इन दिनों अपने भक्तों पर सुख-समृद्धि की वर्षा करती हैं. इस वर्ष नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हुई है और भक्त विधि-विधान से आराधना कर रहे हैं. कल अष्टमी तिथि है, जब मां महागौरी की उपासना का सबसे शुभ अवसर है. इस दिन सही विधि से पूजन करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं.
मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गोरा और उज्ज्वल है. उनके वस्त्र, आभूषण सब सफेद हैं. चार भुजाओं वाली माता का वाहन बैल है. दाहिने ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा, नीचे त्रिशूल, बाएं ऊपरी में डमरू और नीचे वर मुद्रा है. यह रूप पवित्रता और शांति का प्रतीक है.
कहते हैं कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की. तप के दौरान उनका शरीर काला पड़ गया. भगवान शिव प्रसन्न होकर गंगाजल से उन्हें स्नान कराया, जिससे उनका रूप दिव्य और गौर वर्ण का हो गया. तभी से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा. यह कथा सच्ची भक्ति की शक्ति बताती है.
अष्टमी के दिन मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयां, हलवा और काले चने का प्रसाद चढ़ाना शुभ माना जाता है. भक्तों का विश्वास है कि ऐसा भोग लगाने से माता प्रसन्न होकर जीवन में सुख-शांति और वैवाहिक सुख प्रदान करती हैं. सफेद रंग की मिठाइयां और फूल भी विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं.
भक्त अष्टमी पर इन मंत्रों का जाप अवश्य करें –
'या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.'
और 'श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः. महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा.'
जाप से मन शांत होता है और कृपा प्राप्त होती है.
इस अष्टमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर मां की आराधना करें. सफेद फूल, नारियल और हलवा-पूरी का भोग लगाएं. मंत्र जाप के साथ हार्दिक श्रद्धा रखें. सच्चे मन से की गई पूजा हर मनोकामना पूरी करती है. मां महागौरी सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.