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अमावस्या, पंचक, खरमास तीनों का विशेष संयोग, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और क्या न करें जानें

पंचांग के अनुसार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:43 बजे तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक उपलब्ध है. अमावस्या का प्रभाव: चैत्र अमावस्या 18 मार्च से शुरू होकर 19 मार्च सुबह 6:52 बजे तक रहेगी. सूर्योदय अमावस्या में होने से पूरे दिन इसका असर माना जाता है.

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Edited By: Antima Pal
अमावस्या, पंचक, खरमास तीनों का विशेष संयोग, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और क्या न करें जानें
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इस बार घटस्थापना वाले दिन तीन विशेष योगों का संयोग बन रहा है, जिससे भक्तों में थोड़ी चिंता है. चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रही है और 27 मार्च तक चलेगी. पहला दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना का होता है, लेकिन इस बार अमावस्या, पंचक और खरमास तीनों का प्रभाव रहेगा. 

पंचांग के अनुसार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:43 बजे तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक उपलब्ध है. अमावस्या का प्रभाव: चैत्र अमावस्या 18 मार्च से शुरू होकर 19 मार्च सुबह 6:52 बजे तक रहेगी. सूर्योदय अमावस्या में होने से पूरे दिन इसका असर माना जाता है. अमावस्या पितरों के लिए समर्पित होती है, इसलिए इस दिन नए मांगलिक कार्य या शुभ शुरुआत वर्जित रहती है. हालांकि घटस्थापना जैसी धार्मिक पूजा प्रतिपदा शुरू होने के बाद की जा सकती है.

पंचक का संयोग: पंचक 16 मार्च से 21 मार्च तक चल रहा है, जिससे नवरात्रि के पहले तीन दिन पंचक में आ रहे हैं. पंचक में कुछ लोग अशुभ मानते हैं, लेकिन घटस्थापना और देवी पूजा की अनुमति है. अन्य मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश या नया वाहन खरीदना टालें.

खरमास की अवधि: खरमास (मालमास) 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा. सूर्य मीन राशि में होने से यह पीरियड माना जाता है, जहां सूर्य और गुरु की शक्ति कमजोर पड़ती है. इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन या कोई बड़ा शुभ कार्य नहीं किए जाते. नवरात्रि में भी ऐसे कार्य वर्जित रहेंगे.

घटस्थापना और पूजा में क्या करें: सुबह स्नान कर शुद्ध होकर कलश स्थापना करें. गाय के गोबर से चौकी बनाएं, उस पर ज्वारे बोएं और कलश में जल, सुपारी, सिक्का आदि रखें. मां शैलपुत्री की पूजा करें, पीले फूल, हल्दी चढ़ाएं. दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का जाप करें. सात्विक भोजन और व्रत रखें. नकारात्मक विचारों से दूर रहें, ध्यान और भक्ति में समय बिताएं.

नवरात्रि में क्या न करें:- मांस, मदिरा, तामसिक भोजन से परहेज करें. बाल, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना वर्जित. झूठ, क्रोध, झगड़ा या नकारात्मक बातें न करें. खरमास और पंचक के कारण कोई नया मांगलिक कार्य शुरू न करें. यह दुर्लभ संयोग 17 साल बाद बन रहा है, लेकिन देवी की पूजा और भक्ति से सभी दोष दूर हो जाते हैं. भक्तों को सलाह है कि शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें और पूरे नौ दिन मां दुर्गा की आराधना में लीन रहें. इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी और जीवन में खुशहाली आएगी.