छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां शादी से लौट रही दो नाबालिग लड़कियों के साथ सात युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया. घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.सरगुजा के सीतापुर थाना क्षेत्र में यह भयावह घटना सामने आई. चार नाबालिग सहेलियां एक शादी समारोह से लौट रही थीं, तभी रास्ते में कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया. खुशियों से भरी रात अचानक डर और दहशत में बदल गई. यह घटना पूरे इलाके को झकझोर देने वाली साबित हुई।
बताया जा रहा है कि करीब छह मोटरसाइकिलों पर सवार 12 युवक रास्ते में पहले से मौजूद थे. उन्होंने लड़कियों को रोकने की कोशिश की और जब उन्होंने विरोध किया, तो उन्हें जबरन पकड़ लिया गया. इस दौरान एक लड़की मौके से भागने में सफल रही, लेकिन बाकी तीन को आरोपियों ने घेर लिया.
आरोप है कि एक नाबालिग को बाइक पर बैठाकर दूर खेतों में ले जाया गया, जहां चार युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. वहीं दूसरी लड़की के साथ स्कूल मैदान के पास तीन युवकों ने दरिंदगी की. दोनों पीड़िताएं 15 साल से कम उम्र की बताई जा रही हैं, जिससे यह मामला और गंभीर हो जाता है.
एक अन्य नाबालिग को भी आरोपी बाइक पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसने साहस दिखाया. रास्ते में मौका मिलते ही वह बाइक से कूद गई और खेतों के रास्ते भाग निकली. आरोपियों ने उसका पीछा भी किया, लेकिन वह खुद को बचाने में सफल रही. उसकी सूझबूझ ने एक बड़ी वारदात को टाल दिया.
घटना के बाद दोनों पीड़िताएं देर रात घर पहुंचीं, लेकिन डर और सदमे के कारण उन्होंने तुरंत किसी को कुछ नहीं बताया. अगले दिन शाम को जब एक लड़की ने अपने परिवार को पूरी बात बताई, तब मामला सामने आया. इसके बाद परिवार वालों ने थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई.
परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी पुलिस ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की. न तो तत्काल एफआईआर दर्ज की गई और न ही मेडिकल जांच कराई गई. पीड़िताओं को अगले दिन आने के लिए कहा गया, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं.
जब मामले ने तूल पकड़ा और स्थानीय स्तर पर दबाव बढ़ा, तब जाकर पुलिस ने कार्रवाई की. एक पीड़िता के मामले में चार आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया गया. हालांकि दूसरे मामले में अब तक पूरी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगे हैं.
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस ने सिर्फ एक मामले में एफआईआर दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली. दूसरे मामले में अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. इससे साफ है कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी हो सकती है.
दोनों पीड़िताएं आदिवासी समुदाय से हैं, जिससे इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है. स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इलाके में गुस्सा साफ देखा जा सकता है.
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. आखिर कैसे इतनी बड़ी वारदात खुलेआम हो गई? और क्यों समय पर कार्रवाई नहीं हुई? ये सवाल अब पूरे सिस्टम के सामने खड़े हैं. लोगों में डर का माहौल भी साफ महसूस किया जा रहा है.
न्याय की मांग और आगे की राहअब पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं. प्रशासन पर दबाव है कि वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त सजा दिलाए. साथ ही यह भी जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े.