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कितने दिन में बदल देना चाहिए हाथ में बंधा कलावा? जान लें सही नियम वरना मुसीबत पड़ सकती है गले!

हिंदू धर्म में कलावा को पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी भी शुभ कार्य के बाद हाथ में बांधने की प्राचीन परंपरा है. यह साधारण धागा नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा का प्रतीक है. मान्यता है कि कलावा बांधने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है.

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Edited By: Antima Pal
कितने दिन में बदल देना चाहिए हाथ में बंधा कलावा? जान लें सही नियम वरना मुसीबत पड़ सकती है गले!
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हिंदू धर्म में कलावा को पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी भी शुभ कार्य के बाद हाथ में बांधने की प्राचीन परंपरा है. यह साधारण धागा नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा का प्रतीक है. मान्यता है कि कलावा बांधने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है. शास्त्रों में इसके बांधने, पहनने और बदलने के स्पष्ट नियम बताए गए हैं. इनका पालन करने से मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है.

कलावा बांधने के आसान नियम

कलावा बांधते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:-

पुरुष और अविवाहित कन्याएं दाहिने हाथ में कलावा बांधें.

विवाहित महिलाएं बाएं हाथ में कलावा बांधें.

बांधते समय हाथ में एक सिक्का या थोड़ा धन रखें और मुट्ठी बंद रखें.

दूसरा हाथ सिर पर रखें.

कलावा को आमतौर पर 3, 5 या 7 बार लपेटकर बांधा जाता है.

बांधने वाले व्यक्ति को दक्षिणा अवश्य दें.

इस दौरान कोई पवित्र मंत्र का जाप भी किया जा सकता है, जिससे कलावे की शक्ति बढ़ती है.

कलावा बांधना सिर्फ रिवाज नहीं, बल्कि एक संकल्प और सुरक्षा का माध्यम माना जाता है.

कलावा कब बदलना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा को लगभग 21 दिनों तक पहनना उचित होता है. 21 दिन एक मंडल की अवधि मानी जाती है. इस दौरान कलावे में मंत्रों और पूजा की सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है. 21 दिन बाद इसकी शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसलिए समय-समय पर नया कलावा बदल लेना चाहिए. यदि कलावे का रंग फीका पड़ जाए, धागा कमजोर हो जाए या टूटने लगे तो इसे तुरंत बदल देना चाहिए. लंबे समय तक पुराना कलावा पहने रहना अशुभ माना जाता है.

महत्वपूर्ण:- 

एक बार उतारे गए कलावे को कभी दोबारा नहीं बांधना चाहिए. ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. हमेशा नया कलावा ही बांधें. 

कलावा उतारने और बदलने के नियम

कलावा बदलने के लिए भी शुभ दिन चुनें. शास्त्रों के अनुसार मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे उचित माना गया है. सुबह स्नान के बाद पवित्र स्थान पर बैठकर इसे उतारें. 

उतारे गए पुराने कलावे का सम्मानपूर्वक निपटान करें:- 

मंदिर में रख दें.

पीपल के पेड़ के नीचे रख दें.

बहते जल में प्रवाहित कर दें.

इसे कूड़े में फेंकना या इधर-उधर डालना बिल्कुल सही नहीं माना जाता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलने की आशंका बताई जाती है.

क्यों जरूरी है समय पर बदलना?

कलावा एक निश्चित समय तक ही सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है. 21 दिन बाद उसकी क्षमता कम हो जाती है. नियमित रूप से बदलने से सुरक्षा और कृपा का प्रभाव निरंतर बना रहता है. कई ज्योतिष और धार्मिक विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं कि हर संक्रांति या महीने में एक बार कलावा बदल लेना अच्छा रहता है.