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न माता पार्वती, न देवता... सबसे पहले इस इंसान ने देखे थे बाबा बर्फानी? ये है अमरनाथ गुफा का रहस्य

बाबा बर्फानी के दर्शन सबसे पहले किसने किए थे? किस तरह शुरू हुई थी अमरनाथ यात्रा की शुरुआत? चलिए आज इस आर्टिकल में जानते हैं इससे जुड़ी कुछ पौराणिक कथाएं...

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Edited By: Antima Pal
न माता पार्वती, न देवता... सबसे पहले इस इंसान ने देखे थे बाबा बर्फानी? ये है अमरनाथ गुफा का रहस्य
Courtesy: pinterest

भगवान शिव के प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा पहुंचते हैं. बाबा बर्फानी के नाम से प्रसिद्ध यह पवित्र स्थल हिमालय की गोद में स्थित है. इस साल भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है. अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी. रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से ही शुरू हो चुके हैं. 

कठिन चढ़ाई के बाद यहां बाबा अमरेश्वर के दर्शन मात्र से अनंत पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति का विश्वास है. अमरनाथ गुफा का धार्मिक महत्वपुराणों और ग्रंथों में अमरनाथ को बहुत खास माना गया है. बृंगेश संहिता और नीलमत पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में लिखा है कि अमरनाथ के दर्शन करने से काशी के दर्शन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना अधिक पुण्य मिलता है.

baba barfani dharmik sthal
baba barfani dharmik sthal pinterest

मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने माता पार्वती को 'अमर कथा' सुनाई थी. इस कथा में सृष्टि के रहस्य और अमरता का ज्ञान शामिल था. गुफा में बर्फ से स्वाभाविक रूप से बनने वाला शिवलिंग भक्तों को आकर्षित करता है. यह लिंग मौसम के अनुसार अपना आकार बदलता रहता है, जो खुद में एक चमत्कार है. सच्ची श्रद्धा से आने वाले भक्तों के लिए यहां मोक्ष के द्वार खुलने की मान्यता है.

सबसे पहले किसने किए बाबा बर्फानी के दर्शन?

इस रहस्यमयी गुफा के पहले दर्शन को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार बहुत प्राचीन समय में कश्मीर की घाटी पूरी तरह पानी से भरी हुई एक बड़ी झील थी. ऋषि कश्यप ने नदियों और धाराओं के रास्ते इस पानी को निकाल दिया. उसी समय ऋषि भृगु हिमालय की यात्रा पर निकले थे. रास्ते में उन्हें यह पवित्र गुफा मिली और उन्होंने सबसे पहले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन किए. इसलिए कई ग्रंथों में ऋषि भृगु को अमरनाथ के प्रथम द्रष्टा के रूप में सम्मान दिया जाता है.

baba barfani dharmik sthal
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दूसरी लोक कथा 15वीं शताब्दी से जुड़ी है. स्थानीय चरवाहे बूटा मलिक को एक संत ने कोयले भरा थैला दिया. घर जाकर जब उन्होंने थैला खोला तो कोयला सोने के सिक्कों में बदल चुका था. खुशी में वापस लौटकर उन्होंने गुफा की खोज की. इस घटना के बाद गुफा की जानकारी आम लोगों तक पहुंची और अमरनाथ यात्रा फिर से लोकप्रिय हुई. आज भी बूटा मलिक के वंशजों को यात्रा से जुड़े कुछ अधिकार प्राप्त हैं. 

अमरनाथ केवल कथाओं तक सीमित नहीं है. 12वीं शताब्दी में कल्हण द्वारा लिखित प्रसिद्ध ग्रंथ राजतरंगिणी में अमरेश्वर या अमरनाथ शिवलिंग का स्पष्ट उल्लेख मिलता है. इसमें बताया गया है कि 11वीं शताब्दी में कश्मीर की रानी सूर्यमती ने त्रिशूल भेंट चढ़ाया था. इससे साबित होता है कि गुफा की पूजा सदियों से चली आ रही है.

कैसे शुरू हुई अमरनाथ यात्रा?

प्राचीन काल से ही यह स्थान शिव भक्तों का प्रिय तीर्थ रहा है. ऋषि-मुनियों ने यहां ध्यान और पूजा की. समय के साथ यह यात्रा लोकप्रिय हुई. आज यह भारत की सबसे कठिन और भावुक यात्राओं में से एक है. पहलगाम और बालटाल मार्ग से भक्त बर्फीले रास्तों, ऊंची चोटियों और खूबसूरत घाटियों को पार करते हुए गुफा तक पहुंचते हैं. अमरनाथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, साहस और प्रकृति की अद्भुत शक्ति का संगम है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा बर्फानी को प्रणाम करते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं.