शिरडी के साईं बाबा अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध हैं. हर गुरुवार को उनके भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ उनका व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि साईं नाथ की सच्ची भक्ति से बिगड़े काम बन जाते हैं और किस्मत संवर जाती है. गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा विधि काफी सरल है, लेकिन कुछ खास नियमों का पालन करना आवश्यक होता है.
सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. घर के किसी पवित्र स्थान पर एक साफ चौकी बिछाएं. उस पर पीला या केसरिया वस्त्र फैलाएं. चौकी पर साईं बाबा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें. पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल और अक्षत लेकर साईं बाबा के व्रत का संकल्प लें. इसके बाद बाबा को चंदन का तिलक लगाएं. उन्हें पीले फूल चढ़ाएं और अक्षत अर्पित करें. साईं बाबा को पीले रंग की मिठाइयां अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए उन्हें बेसन के लड्डू, पीले पेड़े, केसर हलवा या अन्य पीली मिठाइयों का भोग लगाएं.
पूजा के दौरान धूप-दीप जलाकर साईं बाबा की आरती अवश्य करें. आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर साईं बाबा की व्रत कथा सुनें. कथा सुनते समय हाथ में पीले फूल और अक्षत रखें. कथा समाप्त होने के बाद इन फूलों को बाबा के चरणों में अर्पित करें और अपनी मनोकामना विनम्रता से बाबा से कहें. पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सभी भक्तों और परिवारजनों में बांट दें.
पूजा के दौरान साफ-सुथरे और शुद्ध वस्त्र पहनें.
मन में एकाग्रता और पूर्ण श्रद्धा रखें.
बाबा को चढ़ाया गया प्रसाद कभी भी बासी न हो.
गुरुवार को मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें.
पूजा स्थल पर महिलाएं और पुरुष दोनों ही स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.
व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन फलाहार या सात्विक भोजन ही करना चाहिए.
भक्तों का मानना है कि गुरुवार को साईं बाबा की पूजा करने से उनके आशीर्वाद से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं. नौकरी, व्यापार, विवाह और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी राहत मिलती है. साईं बाबा कहते थे - 'श्रद्धा और सबुरी.' अगर इन दोनों का साथ हो तो बाबा हर भक्त की झोली खुशियों से भर देते हैं. इसलिए हर गुरुवार को पूरे विश्वास के साथ साईं नाथ की पूजा करें.