menu-icon
India Daily

'भक्त के प्रेम में पीछे चल पड़े थे ठाकुर जी..', इस मंदिर में संभलकर कराए जाते हैं बांके बिहारी के दर्शन, जानें धार्मिक महत्व

कहा जाता है कि एक बार एक भक्त ठाकुर बांके बिहारी जी की दिव्य छवि को अपलक निहार रहा था. भक्त की गहरी श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न होकर ठाकुर जी उसके पीछे चल पड़े थे. तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि भगवान के सामने बीच-बीच में पर्दा लगाया जाए, ताकि कोई भी भक्त उन्हें लगातार एकटक न देख सके और ठाकुर जी फिर किसी भक्त के प्रेम में उसके साथ न चले जाएं.

antima
Edited By: Antima Pal
'भक्त के प्रेम में पीछे चल पड़े थे ठाकुर जी..', इस मंदिर में संभलकर कराए जाते हैं बांके बिहारी के दर्शन, जानें धार्मिक महत्व
Courtesy: Pinterest

Banke Bihari Temple: राजस्थान के कोटा शहर के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित वृंदावन धाम बांके बिहारी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और विशेष मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है. यह मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है और आज हाड़ौती समेत पूरे राजस्थान के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

इस मंदिर में संभलकर कराए जाते हैं बांके बिहारी के दर्शन

मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को ऐसा महसूस होता है जैसे वे सीधे वृंदावन पहुंच गए हों. यहां का भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन और ठाकुर जी की मनमोहक छवि हर किसी का मन मोह लेती है.

'भक्त के प्रेम में पीछे चल पड़े थे ठाकुर जी..'

मंदिर के सेवकों के अनुसार 15 फरवरी 2010 को यहां बांके बिहारी जी की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. बताया जाता है कि जिस भूमि पर आज यह भव्य मंदिर खड़ा है, वह पहले बाबा राधे जी की थी. उन्होंने इस भूमि को धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था. बाद में श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया.

बेहद भावुक धार्मिक मान्यता जुड़ी

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां होने वाले दर्शन की परंपरा है. अन्य मंदिरों की तरह यहां लगातार दर्शन नहीं कराए जाते, बल्कि कुछ-कुछ समय के अंतराल पर पर्दा लगाया जाता है. इसके पीछे एक बेहद भावुक धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है.

भगवान के सामने बीच-बीच में लगाया जाता है पर्दा

कहा जाता है कि एक बार एक भक्त ठाकुर बांके बिहारी जी की दिव्य छवि को अपलक निहार रहा था. भक्त की गहरी श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न होकर ठाकुर जी उसके पीछे चल पड़े थे. तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि भगवान के सामने बीच-बीच में पर्दा लगाया जाए, ताकि कोई भी भक्त उन्हें लगातार एकटक न देख सके और ठाकुर जी फिर किसी भक्त के प्रेम में उसके साथ न चले जाएं.

मंदिर में प्रतिदिन चार आरतियां होती हैं. सुबह 8 बजे मंगला आरती, दोपहर 12 बजे राजभोग आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती और रात 9:30 बजे शयन आरती आयोजित की जाती है. आरती से पहले होने वाला भजन-कीर्तन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देता है.

इसके अलावा हर एकादशी पर विशेष दर्शन और पूर्णिमा के अवसर पर भव्य भजन-कीर्तन व शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है. इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. यही कारण है कि यह मंदिर आज केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत केंद्र बन चुका है.