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विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 90 लाख नाम

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों से पहले करीब 90 लाख नाम हटा दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि केवल उन्हीं मामलों को वोटर लिस्ट में रखा गया या फिर वापस एड किया गया है.

Shilpa Shrivastava
विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 90 लाख नाम
Courtesy: Pinterest

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहल वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटा दिए गए हैं. इनमें से, लगभग 63 लाख नाम 28 फरवरी को प्रकाशित लास्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. वहीं, बाकी के 27 लाख नाम न्यायिक अधिकारियों द्वारा उचित जांच और निर्णयों के बाद हटाए गए. अधिकारियों ने साफ करते हुए कहा है कि केवल उन्हीं मामलों को वोटर लिस्ट में रखा गया या फिर वापस एड किया गया है, जिनका सही तरह से वेरिफिकेशन किया गया था. इन्हें न्यायिक अधिकारियों द्वारा मंजूरी दी गई थी.

बता दें कि जो मामले अभी भी अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने लंबित हैं, उन्हें इस चुनाव में शामिल नहीं किया जाएगा. भविष्य के चुनावों के लिए उन पर बाद में विचार किया जा सकता है. आंकड़ों के अनुसार, समीक्षा के लिए जो नए नाम आए थे उनमें से लगभग 45% को हटा दिया गया है. वहीं, 55% को वेरिफिकेशन के बाद वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है. 

अपीलीय न्यायाधिकरण करेगी मामलों की सुनवाई:

अपीलीय न्यायाधिकरण ने अब तक केवल तीन से चार मामलों की सुनवाई की है, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय में दायर कुछ तत्काल याचिकाएं भी शामिल हैं. इन पर सुनवाई शुरू होना अभी बाकी है, जिसका मुख्य कारण बताया जा रहा है कि न्यायाधिकरण के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर अभी तक तैयार नहीं हुआ है. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि न्यायाधिकरण सबसे पहले उन मामलों पर सुनवाई करेगा, जिनमें डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करने की जरूरत है. 

न्यायाधिकरण के पास रिकॉर्ड की जांच करने या और डॉक्यूमेंट्स मांगने की शक्ति होगी. आम जनता से संबंधित सुनवाई के लिए अभी तक कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया न्यायाधिकरण की देखरेख में ही की जानी चाहिए, ऐसे में सुनवाई जल्द ही शुरू होने की संभावना है. 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी करेंगे बंगाल का दौरा:

इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी चुनावों से पहले सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के लिए संवेदनशील और ज्यादा हिंसा वाले जिलों का दौरा करेंगे. इस दौरान चीफ इलेक्ट्रॉल ऑफिसर कई लोगों से मुलाकात करेंगे जिनमें स्थानीय पुलिस अधिकारियों, उप-विभागीय अधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों और जिलाधिकारी शामिल होंगे.