असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है. इन दोनों अहम राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है. गडकरी ने दोनों राज्यों में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का दावा किया है. इसके साथ ही, उन्होंने अल्पसंख्यकों को लेकर पार्टी के रुख को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है.
अक्सर विपक्षी दलों द्वारा बीजेपी पर अल्पसंख्यक विरोधी होने के आरोपों का नितिन गडकरी ने दो टूक जवाब दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "बीजेपी 'सबका साथ, सबका विकास' की समावेशी नीति पर चलती है. हमारी पार्टी किसी भी धार्मिक समूह या मुसलमानों के खिलाफ बिल्कुल नहीं है, लेकिन हां, हम अवैध घुसपैठियों के सख्त खिलाफ हैं." गडकरी ने यह भी चेताया कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, यह कोई धर्मशाला नहीं है कि कोई भी अवैध रूप से यहां आकर बस जाए.
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सत्ता वापसी की राह देख रही बीजेपी के लिए विकास सबसे बड़ा चुनावी हथियार है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए करीब 5 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं.
इन राजमार्गों और लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट्स से पूरे पूर्वोत्तर की तस्वीर और तकदीर बदलने का दावा किया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल की सियासत पर बोलते हुए गडकरी ने कहा कि वहां की जनता अब बदलाव के मूड में है और बीजेपी वहां सिर्फ सुशासन और विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी गडकरी ने पटलवार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों के मुद्दों पर कोई राजनीति नहीं करती, बल्कि देश हित उसके लिए सर्वोपरि है.
बता दें कि असम की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होना है. वहीं, पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों के चुनावी नतीजे 4 मई को एक साथ घोषित किए जाएंगे.