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'मां नहीं बन पाओगी', डॉक्टरों के जवाब देने के बाद भी नहीं टूटी, जानें कैसे महिला ने बिना गर्भाशय के ‘मिरेकल बेबी’ को दिया जन्म

ब्रिटेन में एक महिला जो बिना यूट्रस के पैदा हुई थी, उसने एक मृत डोनर से यूट्रस ट्रांसप्लांट करवाने के बाद एक हेल्दी बच्चे को जन्म दिया है. यह मेडिकल साइंस में एक ऐतिहासिक सफलता है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: ब्रिटेन में एक बड़ी मेडिकल उपलब्धि हासिल हुई है, जहां एक महिला ने एक मरे हुए डोनर से यूट्रस ट्रांसप्लांट करवाने के बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. ग्रेस बेल ने दिसंबर में अपने बेटे, ह्यूगो पॉवेल को जन्म दिया, जिसे वह अपना 'चमत्कारी बच्चा' कह रही है. उनके पार्टनर स्टीव पॉवेल लंदन के क्वीन शार्लोट्स एंड चेल्सी हॉस्पिटल में डिलीवरी के समय मौजूद थे. बच्चे का वजन 3.09 किलोग्राम था.

ग्रेस बेल मेयर-रोकिटांस्की-कस्टर-हाउसर सिंड्रोम के साथ पैदा हुई थीं. यह एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें एक महिला का यूट्रस विकसित नहीं होता है या पूरी तरह से गायब होता है. टीनएजर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि वह कभी कंसीव नहीं कर पाएंगी. ग्रेस ने कहा, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह मुमकिन होगा. 16 साल की उम्र से मुझे लगता था कि मैं कभी मां नहीं बन पाऊंगी. यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी और चमत्कार है.' 

उन्होंने उस महिला और उसके परिवार का शुक्रिया अदा किया जिसने उनका यूट्रस डोनेट किया और इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा बताया.

कब हुआ था यूट्रस ट्रांसप्लांट?

ग्रेस का यूट्रस ट्रांसप्लांट जून 2024 में ऑक्सफोर्ड के चर्चिल हॉस्पिटल में हुआ, जो लगभग 10 घंटे तक चला. कुछ महीनों बाद उन्होंने लंदन के लिस्टर फर्टिलिटी क्लिनिक में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करवाया, जिससे प्रेग्नेंसी सफल रही. कपल ने अपने बेटे का नाम 'रिचर्ड' रखा है, जो वॉम्ब ट्रांसप्लांट UK के क्लिनिकल लीड प्रोफेसर रिचर्ड स्मिथ के सम्मान में है. डॉक्टरों ने पूरे प्रोसेस को एक हैरान करने वाला सफर बताया.

डोनर ने अन्य लोगों को भी पांच ऑर्गन किए है दान?

डोनर की पहचान पब्लिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके पांच ऑर्गन चार अलग-अलग लोगों में ट्रांसप्लांट किए गए, जिससे उनकी जान बच गई. द गार्डियन के मुताबिक डोनर के माता-पिता ने कहा कि अपनी बेटी को खोना बहुत डरावना था लेकिन ऑर्गन डोनेशन के जरिए उसने कई परिवारों को उम्मीद, जिंदगी और खुशी दी है. 

उन्होंने इसे दया और प्यार की विरासत बताया. यह कामयाबी न सिर्फ मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी उम्मीद की एक नई किरण है, जो किसी भी वजह से मां नहीं बन पातीं.