123 किलो गांजा, एक माफिया और STF का जाल...प्रेमचंद मौर्य की गिरफ्तारी ने खोले बड़े राज

UP STF ने अंतर्राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 123 किलो गांजे के साथ सक्रिय माफिया सदस्य प्रेमचंद मौर्य को गिरफ्तार किया.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नशे के सौदागर चाहे कितने भी शातिर हों, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते. STF ने अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय एक बड़े नशा तस्करी गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके एक सक्रिय और अहम सदस्य को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब STF की टीम लंबे समय से इस गिरोह पर नज़र रख रही थी.

कौन है प्रेमचंद मौर्य?

गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रेमचंद मौर्य के रूप में हुई है जिसे नशा तस्करी के इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क का एक सक्रिय और जिम्मेदार सदस्य बताया जा रहा है. प्रेमचंद मौर्य लंबे समय से इस गिरोह के लिए काम कर रहा था और एक राज्य से दूसरे राज्य तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की जिम्मेदारी उसी की थी. STF सूत्रों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उसका नाम नशा तस्करी से जुड़े मामलों में सामने आया है.

123 किलो गांजा जब्त 

STF की इस कार्रवाई में सबसे बड़ी बात यह रही कि प्रेमचंद मौर्य के पास से 123 किलो गांजा बरामद किया गया. इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी यह साफ करती है कि यह कोई छुटभैया तस्कर नहीं बल्कि एक बड़े और संगठित नेटवर्क का हिस्सा है. इस मात्रा के गांजे की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है जो इस गिरोह के आर्थिक पैमाने का अंदाजा देती है. जब्त किया गया गांजा किस राज्य से आया था और किस राज्य में पहुंचाया जाना था, इसकी जांच STF तेजी से कर रही है.


STF की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रेमचंद मौर्य जिस गिरोह का हिस्सा था वह सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और एक राज्य में उगाए या इकट्ठा किए गए नशीले पदार्थ दूसरे राज्यों में खपाए जाते थे. इस तरह के अंतर्राज्यीय नेटवर्क को तोड़ना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इनके तार बहुत दूर-दूर तक फैले होते हैं. STF अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के और कितने सदस्य हैं और वे किन-किन राज्यों में सक्रिय हैं.

UP STF की यह कामयाबी रातोंरात नहीं मिली. टीम ने पहले गुप्त सूचनाओं के आधार पर इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखी. फिर सही मौके का इंतजार किया और जब प्रेमचंद मौर्य माल के साथ मूवमेंट में था तब उसे दबोचा गया. यह पूरी कार्रवाई बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई जिसमें STF के अनुभवी अधिकारियों की अहम भूमिका रही.