नई दिल्ली: गृहिणी का काम आखिर कितने रुपये का है. सुबह परिवार के लिए नाश्ता बनाने से लेकर रात का खाना तैयार करने, घर की सफाई, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों की जरूरतों और घर के छोटे बड़े कामों को संभालने तक गृहिणियां बिना किसी छुट्टी के काम करती हैं.
इसके बावजूद उनके इस काम को अक्सर नौकरी या आर्थिक योगदान के तौर पर नहीं देखा जाता. अब सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने इसी सवाल को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि क्या हाउसवाइफ को घर संभालने के बदले हर महीने सैलरी मिलनी चाहिए.
वायरल पोस्ट में एक शख्स ने बताया कि उसने अपनी गृहिणी पत्नी को हर महीने एक तय रकम देना शुरू किया है. उसका कहना है कि यह रकम पत्नी के घरेलू श्रम के सम्मान के तौर पर है. घर के राशन, बिजली पानी और दूसरे जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी पति खुद उठाते हैं. पत्नी को दी जाने वाली मासिक रकम उसकी व्यक्तिगत आय की तरह है, जिसे वह अपनी इच्छा के अनुसार खर्च कर सकती है या बचत कर सकती है.
पोस्ट में शख्स ने एक दिलचस्प सवाल भी उठाया. अगर घर के काम के लिए कुक, मेड या हाउस मैनेजर रखा जाए तो उन्हें उनकी सेवाओं के बदले पैसे दिए जाते हैं. ऐसे में वही काम पत्नी करती है तो उसके श्रम का आर्थिक मूल्य शून्य क्यों माना जाए.
इस विचार ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. कई लोगों ने पति के इस फैसले की तारीफ की. उनका कहना है कि गृहिणी को अलग से पैसा मिलने से उसकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ती है. वह अपने छोटे बड़े खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहती. इसके अलावा वह अपनी पसंद से बचत कर सकती है और जरूरत पड़ने पर अपने माता पिता की आर्थिक मदद भी कर सकती है.
वहीं कुछ लोग इस व्यवस्था से सहमत नहीं हैं. उनका तर्क है कि पति पत्नी का रिश्ता नौकरी देने वाले और कर्मचारी का रिश्ता नहीं है. घर दोनों का है और घरेलू जिम्मेदारियां भी परिवार की साझी जिम्मेदारी होनी चाहिए. उनके अनुसार हर घरेलू काम को पैसे से जोड़ने से रिश्ते में भावनात्मक दूरी या हिसाब किताब की भावना पैदा हो सकती है.
हालांकि इस बहस का एक दूसरा पहलू भी है. गृहिणी को सैलरी देना जरूरी है या नहीं, यह हर परिवार की अपनी आर्थिक स्थिति और आपसी सहमति पर निर्भर कर सकता है लेकिन यह बात महत्वपूर्ण है कि घरेलू काम को केवल इसलिए कमतर नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उसके बदले सीधे पैसे नहीं मिलते.