देहरादून: उत्तराखंड के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने अनुरोध के आधार पर तबादले से वंचित रह गए शिक्षकों को एक और मौका देने का फैसला लिया है. यह मौका धारा-27 के तहत दिया जा रहा है, जिससे कई शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. उन्हें कहा गया है कि स्थानांतरण के लिए आने वाले आवेदनों की नियमानुसार जांच करें और सही प्रस्ताव भेजें. अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा परमेंद्र सकलानी के आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 में जिन शिक्षकों और कार्मिकों का तबादला पहले ही हो चुका है, उनके नए आवेदन दोबारा स्वीकार नहीं किए जाएंगे. अधिकारियों को आवेदन मिलते ही इसकी जांच करनी होगी.
आवेदनों को पदवार और संवर्गवार अलग-अलग वर्गीकृत करना होगा. जनपद स्तर के और अंतरजनपदीय प्रस्तावों को अलग-अलग तैयार कर भेजना जरूरी है. संवर्ग परिवर्तन के आधार पर आए आवेदनों की जांच 19 दिसंबर 2025 के शासनादेश के अनुसार की जाएगी. विकासखंड स्तर पर आए आवेदनों की जांच उप शिक्षा अधिकारी या संबंधित सक्षम अधिकारी करेंगे. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा स्तर पर दोबारा जांच करेंगे. वे संकलित सूची के साथ प्रमाण पत्र भी देंगे कि सभी मामलों की नियमानुसार जांच हो चुकी है.
निदेशालय ने सभी जिला अधिकारियों से कहा है कि वे ये प्रस्ताव एक सप्ताह के अंदर भेज दें. इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने वाली है जो अनुरोध के आधार पर तबादला नहीं करवा पाए थे. कई शिक्षक लंबे समय से परिवार के पास या बेहतर जगह पर स्थानांतरण की मांग कर रहे थे. अब धारा-27 के जरिए उन्हें नया मौका मिल रहा है.
शिक्षक समुदाय में इस खबर को सकारात्मक रूप से लिया जा रहा है. उम्मीद है कि सही प्रक्रिया अपनाए जाने से योग्य शिक्षकों को उचित स्थान पर तैनाती मिल सकेगी. निदेशालय का यह कदम शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है. शिक्षकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने आवेदनों में सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से जमा करें ताकि कोई दिक्कत न हो.
कुल मिलाकर यह खबर उत्तराखंड के प्रारंभिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए राहत देने वाली है. सही जांच और समय पर प्रस्ताव भेजने से प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी.