परली: महाराष्ट्र के परली में एक परिवार के लिए बेटी का जन्म बेहद खास मौका बन गया. दहिफले परिवार में करीब 200 साल बाद बेटी का जन्म हुआ. परिवार ने इस खुशी को यादगार बनाने के लिए ऐसा जश्न मनाया, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है. गुरुवार को परिवार की छोटी बहू कल्पना ने एक बच्ची को जन्म दिया. बच्ची की मां और नवजात को शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिली.
इसके बाद परिवार उन्हें सामान्य तरीके से घर ले जाने के बजाय सजाए गए रथ में बैठाकर पूरे उत्साह के साथ घर लेकर पहुंचा. बच्ची के घर पहुंचने पर परिवार और रिश्तेदारों ने जमकर खुशियां मनाईं. पूरे रास्ते ढोल-नगाड़े बजाए गए और आतिशबाजी की गई. घर को फूलों और आकर्षक लाइटों से सजाया गया था.
महाराष्ट्र के बीड के दहिफले परिवार में एक बच्ची के जन्म से खुशियों की लहर दौड़ गई, क्योंकि रिश्तेदारों के मुताबिक करीब 200 साल बाद परिवार में बेटी का जन्म हुआ है. नवजात बच्ची को अस्पताल से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और मिठाइयों के साथ सजी हुई रथ में घर लाया गया.#beed #maharashtra… pic.twitter.com/uiRlRfNurx
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रथ में मां और बच्ची को बैठाकर जब जुलूस घर पहुंचा तो वहां पहले से ही रिश्तेदार, दोस्त और परिवार के शुभचिंतक मौजूद थे. घर के दरवाजे पर परिवार के सदस्यों ने बच्ची की आरती उतारी और उसका आशीर्वाद के साथ स्वागत किया. खुशी के इस मौके पर लोगों को मिठाई भी बांटी गई. खास तौर पर जलेबी बांटकर बेटी के जन्म का जश्न मनाया गया.
भगवान प्राइमरी स्कूल, परली के हेडमास्टर लिंबाजी दहिफले अपनी पोती के जन्म से बेहद खुश हैं. परिवार के मुताबिक, उनके परिवार में लगभग 200 वर्षों से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था. ऐसे में इस बच्ची का आना परिवार के लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं है. परिवार ने बच्ची के जन्म को सिर्फ पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे बड़े स्तर पर मनाकर पूरे समाज के सामने एक उदाहरण भी पेश किया.
आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटे के जन्म को बेटी की तुलना में ज्यादा महत्व दिया जाता है. कई जगहों पर बेटी के जन्म को लेकर लोगों की सोच सकारात्मक नहीं होती. ऐसे माहौल में दहिफले परिवार का यह कदम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है. परिवार ने दिखाया कि बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का अवसर है, जितना बेटे का जन्म. बेटियां परिवार के लिए बोझ नहीं, बल्कि खुशी और आशीर्वाद होती हैं.