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मेक्सिको का ऐसा रहस्यमयी गांव जहां जन्म से अंधे पैदा होते हैं लोग और जानवर, इसके पीछे की वजह जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

मेक्सिको का टिल्टेपेक गांव अपनी रहस्यमयी पहचान के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है. स्थानीय लोग अंधेपन को पुराने श्राप से जोड़ते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसके पीछे आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों की संभावना बताते हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
मेक्सिको का ऐसा रहस्यमयी गांव जहां जन्म से अंधे पैदा होते हैं लोग और जानवर, इसके पीछे की वजह जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
Courtesy: Chatgpt

नई दिल्ली: दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपने रहस्यों और अनोखी कहानियों के कारण लोगों का ध्यान खींचती हैं. मेक्सिको के ओआक्साका प्रांत में स्थित टिल्टेपेक गांव भी ऐसी ही जगहों में शामिल है. इस गांव को कई बार 'अंधों का गांव' कहा जाता है.

हालांकि यह दावा कि यहां सभी बच्चे जन्म से अंधे होते हैं, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों और जानवरों में समय के साथ आंखों की रोशनी कम होने की समस्या देखी गई, जिसने इस गांव को रहस्य और चर्चाओं का विषय बना दिया.

स्थानीय लोगों का क्या है कहना?

टिल्टेपेक गांव में लगभग 300 से 400 लोग रहते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पैदा होने वाले कई बच्चों की आंखें जन्म के समय सामान्य होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद उनकी दृष्टि कमजोर होने लगती है. कुछ मामलों में यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि प्रभावित व्यक्ति लगभग पूरी तरह दृष्टिहीन हो सकता है. गांव के लोगों का यह भी दावा है कि कुछ जानवरों में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिली है. हालांकि, इन दावों की पुष्टि सभी मामलों में वैज्ञानिक रूप से नहीं हुई है.

अंधेपन को लेकर क्या है लोककथा?

गांव में अंधेपन को लेकर एक पुरानी लोककथा भी प्रचलित है. स्थानीय मान्यता के अनुसार गांव में कभी एक रहस्यमयी पेड़ था, जिसे देखने वाले व्यक्ति की आंखों की रोशनी चली जाती थी. गांव के कई बुजुर्ग आज भी इस कहानी पर विश्वास करते हैं और इसे पीढ़ियों से सुनाते आ रहे हैं. लेकिन इस कथित श्राप का कोई वैज्ञानिक प्रमाण आज तक नहीं मिला है.

वैज्ञानिकों ने क्या बताया?

वैज्ञानिक इस रहस्य को अलग नजरिए से देखते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आबादी वाले समुदायों में लंबे समय तक एक ही समूह के भीतर विवाह होने से कुछ आनुवंशिक बीमारियां पीढ़ी दर पीढ़ी अधिक दिखाई दे सकती हैं.

इसके अलावा कुछ शोधकर्ताओं ने पर्यावरणीय कारणों, पानी और मिट्टी में मौजूद तत्वों या कुछ संक्रमणों को भी संभावित वजह माना है. पहले कुछ रिपोर्टों में एक परजीवी संक्रमण और जहरीली मक्खियों जैसी संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया था, लेकिन किसी एक कारण पर पूरी सहमति नहीं बन सकी है.

दृष्टि संबंधी चुनौतियों के बावजूद गांव के लोग सामान्य जीवन जीने का प्रयास करते हैं. वे सुनने, छूने और सूंघने जैसी अन्य इंद्रियों का प्रभावी उपयोग करते हैं. खेती, घरेलू काम और दैनिक जीवन की गतिविधियां अपनी परिस्थितियों के अनुसार करते हैं. बच्चों को भी उनकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें.