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'मैं भी उन बच्चों में से एक हो सकती थी...', ओल्ड राजेंद्र नगर कांड पर आया डॉ. तुन जैन ने ऐसा क्यों कहा?

Dr. Tanu Jain: देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार शाम को भारी बारिश होने की वजह से ओल्ड राजेंद्र नगर के राव कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर गया था. इसकी वजह से तीन स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी. तीनों की उम्र  25 से 28 साल के बीच थी. 3 छात्राओं की जान जाने की वजह से लोग धरने पर बैठकर दिल्ली सरकार, एमसीडी और कोचिंग सेंटर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

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'मैं भी उन बच्चों में से एक हो सकती थी...', ओल्ड राजेंद्र नगर कांड पर आया डॉ. तुन जैन ने ऐसा क्यों कहा?
Courtesy: Pinterest

Old Rajendra Nagar: देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार शाम को दिल दहला देने वाली खबर सामने आई थी. भारी बारिश होने की वजह से ओल्ड राजेंद्र नगर के राव कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर गया था. इसकी वजह से तीन स्टूडेंट्स की मौत हो गई. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तीन छात्रों के शव बरामद किए गए थे. अब ओल्ड राजेंद्र नगर में छात्राओं की मौत की वजह से कई लोग धरने पर बैठ गए हैं. सभी छात्रा दिल्ली सरकार, एमसीडी और कोचिंग सेंटर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 

मामला इतना गंभीर होने के बाद भी अभी तक कोचिंग सेंटर की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. इसी बीच इस मामले को लेकर डॉक्टर तनु जैन ने एक्स पर पोस्ट किया गया है.  तनु जैन ने पोस्ट शेयर करते हुए तीन स्टूडेंट्स की मौत को लेकर दुख जताया है. 

तनु जैन ने किया पोस्ट

डॉक्टर तनु जैन ने एक्स वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, " मैं भी एक aspirant थी और राजेंद्र नगर में रहता थी और लाइब्रेरी में जाती थी. मैं उनमें से एक हो सकती थी, आप उनमें से एक हो सकते थे. यह न सिर्फ दुखद है बल्कि दिल दहला देने वाला है.  मैं भी एक मां हूं और एक माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने का दर्द सबसे बड़ा दर्द होता है. मुझे नहीं पता कि क्या कहूं जिससे दर्द कम हो जाए, शब्द नहीं हैं. "

क्या है पूरा मामला?

इस हादसे में  3 लोगों की मौत हो गई थी. तीनों की उम्र  25 से 28 साल के बीच थी. एक छात्रा का नाम तानिया सोनी है. दूसरे मृतक का नाम श्रेया यादव (25) और तीसरे का नाम नेविन डालविन (28) है. जांच करते हुए सामने आया बेसमेंट में लाइब्रेरी थी. इस दौरान लाइब्रेरी में लगभग  30 से 35 बच्चे थे. भारी बारिश होने की वजह से बेसमेंट में पानी तेजी से भरने लग गया था. बच्चों को रस्सियों की मदद से बाहर निकाला गया था.