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India Daily

'इसकी चप्पल बैठी है सीट में', महिला ने बेटे के टिकट पर खर्च किए 1500 रुपये लेकिन वो गोद में बैठा रहा, देखें क्यूट वीडियो

वंदे भारत एक्सप्रेस में बच्चे की सीट पर चप्पल रखने का एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इसने इंटरनेट पर सार्वजनिक परिवहन शिष्टाचार और यात्रियों के व्यवहार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

Kanhaiya Kumar Jha
'इसकी चप्पल बैठी है सीट में', महिला ने बेटे के टिकट पर खर्च किए 1500 रुपये लेकिन वो गोद में बैठा रहा, देखें क्यूट वीडियो
Courtesy: X/@sarviind

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की प्रीमियम सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस अक्सर अपनी आधुनिक सुविधाओं के लिए चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग और हटके है. हाल ही में एक मां द्वारा साझा किए गए व्यंग्यात्मक वीडियो ने नेटिजन्स को दो गुटों में बांट दिया है. वीडियो में महिला अपने बच्चे की आरक्षित सीट पर चप्पल रखकर 'औकात' की बात कर रही है. जहां कुछ लोग इसे एक हल्के-फुल्के मजाक के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई अन्य इसे सार्वजनिक संसाधनों और नागरिक शिष्टाचार का अपमान भी मान रहे हैं.

सोशल मीडिया पर हजारों बार देखे गए इस वीडियो में एक महिला अपने परिवार के साथ सात-आठ घंटे का सफर कर रही है. उसने वीडियो में बताया कि उसके परिवार ने यात्रा के लिए कुल तीन सीटें बुक की थीं- एक उसके लिए, एक पति के लिए और एक उनके छोटे बच्चे के लिए. हैरानी की बात यह थी कि बच्चा अपनी आरक्षित सीट पर बैठने के बजाय माता-पिता की गोद में बैठा था. वहीं, बच्चे की खाली सीट पर एक जोड़ी चप्पलें रखी हुई थीं.

'औकात' और चप्पल की रईसी 

महिला ने हिंदी में बोलते हुए तंज कसा कि एक वयस्क टिकट की कीमत करीब 1500 से 1700 रुपये है. उसने जूते-चप्पलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि 100 रुपये की चप्पलें वंदे भारत की प्रीमियम सीट का आनंद ले रही हैं, जबकि बच्चा गोद में बैठा है. उसने इसे हंसी-मजाक के लहजे में 'औकात' के मुद्दे से जोड़ दिया. महिला का यह अंदाज कुछ लोगों को काफी मजाकिया लगा, तो कुछ ने इसे पैसे का अनावश्यक प्रदर्शन माना.

सोशल मीडिया पर बंटी राय 

वीडियो के वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है. 14,000 से अधिक व्यूज वाले इस क्लिप पर लोग अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं. कुछ लोग चप्पल की 'लक्जरी लाइफ' पर चुटकी ले रहे हैं. एक यूजर ने मजाक में लिखा कि चप्पल ने पूरी रईसी दिखाई है और कम से कम चप्पल का यह सफर तो यादगार हो ही जाएगा. हालांकि, आलोचना करने वालों की भी कमी नहीं है, जो इसे सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लापरवाही का प्रतीक मान रहे हैं.

कई इंटरनेट यूजर्स ने महिला के इस व्यवहार को अनुचित और 'एंटाइटल्ड' बताया है. एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि जब बच्चा गोद में ही बैठने वाला था, तो सीट लेने के लिए किसी ने मजबूर नहीं किया था. अन्य लोगों ने इसे केवल पैसे का घमंड दिखाने वाला कंटेंट करार दिया. कुछ ने तो व्यंग्य करते हुए रेल मंत्री से महिला को सम्मानित करने तक की अपील कर डाली, क्योंकि उन्होंने एक महंगी सीट का उपयोग चप्पल रखने के लिए किया.