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कृष्ण की नगरी मथुरा में 'शिक्षा के मंदिर' में मजहबी विवाद, छात्रों से नमाज पढ़ाने के आरोपों पर हेडमास्टर सस्पेंड

मथुरा के नौहझील में एक हेडमास्टर को बच्चों से कथित नमाज पढ़वाने और धर्मांतरण के आरोपों में निलंबित किया गया है. प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है, जबकि ग्रामीण इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर हेडमास्टर का समर्थन कर रहे हैं.

Kanhaiya Kumar Jha
Prem Kaushik
Reported By: Prem Kaushik
कृष्ण की नगरी मथुरा में 'शिक्षा के मंदिर' में मजहबी विवाद, छात्रों से नमाज पढ़ाने के आरोपों पर हेडमास्टर सस्पेंड
Courtesy: Social Media

मथुरा: यूपी के मथुरा जनपद के मांट क्षेत्र स्थित नौहझील ब्लॉक के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से कथित रूप से नमाज पढ़वाने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है. आरोपों के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है.

यह मामला तब सामने आया जब भाजपा के बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने 30 जनवरी को BSA कार्यालय में लिखित शिकायत दी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्कूल के हेडमास्टर जान मोहम्मद बच्चों का “ब्रेनवॉश” कर जबरन नमाज पढ़वाते थे और इस्लाम धर्म को अन्य धर्मों से श्रेष्ठ बताकर बच्चों पर उसे अपनाने का दबाव बनाते थे. आरोप यह भी है कि वह हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां करते थे और राष्ट्रगान गाने पर बच्चों को डांटते थे.

बाहरी हस्तक्षेप और कट्टरपंथ के आरोप

भाजपा नेता दुर्गेश प्रधान का कहना है कि स्कूल में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन हिंदू बच्चों की संख्या अधिक है. उन्होंने आरोप लगाया कि हेडमास्टर स्कूल में बाहरी लोगों, कथित तौर पर तब्लीगी जमात से जुड़े व्यक्तियों को बुलाते थे और बच्चों को इस्लाम धर्म की शिक्षा देते थे. दुर्गेश प्रधान के अनुसार, यह जानकारी उन्हें बच्चों के अभिभावकों से मिली, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन से शिकायत की. शिकायत के दो दिन बाद ही हेडमास्टर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया.

शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई और जांच

बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने बताया कि स्कूल में बच्चों से नमाज पढ़वाने की शिकायत मिलने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से रिपोर्ट मांगी गई थी. प्रारंभिक जांच में हेडमास्टर पर लगे आरोप सही पाए गए, जिसके आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर प्राथमिक विद्यालय नंगला हुमायूं, मांट से अटैच कर दिया गया है. साथ ही बीईओ छाता और मांट को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं. बीएसए के मुताबिक, “बच्चों का इस्लामिकरण अपने आप में एक गंभीर आरोप है, इसे ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.”

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स्थानीय ग्रामीणों का समर्थन और दूसरा पक्ष

हालांकि, इस मामले में एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है. इंडिया डेली की टीम जब गांव नौहझील स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंची तो स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ ने हेडमास्टर पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया. ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाचार्य के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे आरोप लगाए गए हैं. उनका दावा है कि जान मोहम्मद एक अच्छे शिक्षक हैं और उन्होंने कभी भी किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देने या बच्चों को जबरन नमाज पढ़वाने जैसी कोई गतिविधि नहीं की.

छात्राओं की गवाही और षड्यंत्र का दावा

स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा ने भी प्रधानाचार्य का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसी कोई बात नहीं देखी या सुनी. स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में बेवजह धार्मिक रंग देकर शिक्षक को फंसाया जा रहा है, जिससे स्कूल का माहौल और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है. एक ओर जहां प्रशासनिक स्तर पर आरोपों को गंभीर मानते हुए निलंबन और जांच की कार्रवाई की गई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग और स्कूल स्टाफ इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं. अब सबकी निगाहें दो सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि मामला वास्तव में धर्मांतरण से जुड़ा है या फिर किसी शिक्षक को गलत तरीके से निशाना बनाया गया है.