हर दिन लाखों बच्चे स्कूल बसों से सफर करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि लगभग हर स्कूल बस का रंग पीला ही क्यों होता है. पहली नजर में यह सिर्फ एक सामान्य रंग लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सुरक्षा और विज्ञान का गहरा संबंध छिपा हुआ है.
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से पीला रंग सबसे प्रभावी रंगों में शामिल है. यही कारण है कि वर्षों पहले लिया गया यह फैसला आज भी दुनिया के कई देशों में लागू है और बच्चों की सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार पीला रंग इंसानी आंखों को अन्य कई रंगों की तुलना में जल्दी दिखाई देता है. धुंध, बारिश या कम रोशनी जैसी परिस्थितियों में भी इसकी दृश्यता बनी रहती है. सड़क पर चल रहे दूसरे वाहन चालक इसे दूर से आसानी से पहचान लेते हैं, जिससे प्रतिक्रिया देने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिल जाता है.
पीले रंग को लंबे समय से चेतावनी और सावधानी के संकेत के रूप में देखा जाता है. जब सड़क पर पीले रंग की स्कूल बस दिखाई देती है तो वाहन चालक स्वाभाविक रूप से सतर्क हो जाते हैं. इससे बस के आसपास की यातायात गतिविधियां अधिक नियंत्रित रहती हैं और दुर्घटना की संभावना कम हो सकती है.
लाल रंग ध्यान जरूर आकर्षित करता है, लेकिन इसे अक्सर खतरे या रुकने के संकेत से जोड़ा जाता है. वहीं नीला और हरा रंग दूर से उतने प्रभावी नहीं माने जाते, खासकर खराब मौसम में. इसी कारण विशेषज्ञों और परिवहन विभागों ने स्कूल बसों के लिए पीले रंग को सबसे उपयुक्त माना.
स्कूल बसों को पीला रंग देने की शुरुआत वर्ष 1939 में अमेरिका में हुई थी. इसके बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों में अपनाई गई. भारत में भी सड़क परिवहन से जुड़े नियमों के तहत स्कूल बसों का पीला रंग होना आवश्यक है. इसके साथ बसों पर विशेष पहचान, सुरक्षा उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं भी अनिवार्य की गई हैं, ताकि बच्चों का सफर सुरक्षित और व्यवस्थित बना रहे.