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तैयार हैं लेकिन बिक नहीं रहे, फिर क्यों महंगे होते जा रहे हैं घर? समझ लीजिए वजह

कोरोना महामारी के समय रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह से धड़ाम हो गया था. अब इस सेक्टर ने रफ्तार पकड़ी है. अभी भी बहुत सारे घर बिक नहीं रहे हैं लेकिन इनकी कीमत तेजी से बढ़ती जा रही है.

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Courtesy: Social Media

साल 2019 में कोविड के बाद लोगों की आर्थिक स्थिति पर सीधा फर्क पड़ा था. तब से लेकर अब तक बहुत से लोगों की स्थिति अभी तक नहीं सही हो पाई है. मगर कोव‍िड महामारी के बाद प‍िछले दो से तीन साल में द‍िल्‍ली-एनसीआर समेत देश के प्रमुख शहरों में मकानों और अलग-अलग तरह की प्रॉपर्टी की कीमत में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिला है. इसके साथ ही लग्‍जरी फ्लैट की ड‍िमांड भी तेजी से बढ़ी है. रिपोर्टस की मानें तो मकानों की कीमत से ज्यादा घरों के किराए में इजाफा हुआ है. 

जानकारी के मुताबिक, देश के कई ऐसे शहर हैं जहां फ्लैट की आपूर्ति बढ़ने से इन शहरों में ना बिके हुए घरों की संख्या 2019 की तुलना में 24 प्रतिशत बढ़ गई है. इन घरों की बिक्री करने में बिल्डरों को 22 महीने का समय लगेगा.

24 पर्सेंट बढ़ गई खाली घरों की संख्या

रियल स्टेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  इन शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता में ना बिके हुए घरों की संख्या मार्च 2024 तक करीब 4,68,000 यूनिट तक पहुंच गई थी. यह संख्या दिसंबर 2019 की तुलना में 24 प्रतिशत ज्‍यादा है. इतने घर बनकर तैयार होने के बावजूद बिक्री के अनुमानित समय में उल्लेखनीय कमी आई है. जेएलएल ने इस बारे में कहा, 'ब‍िना ब‍िके घरों को बेचने में लगने वाले समय में 31 प्रतिशत की कमी आई है'.

घरों की डिमांड मेंं इजाफा

पिछले दो से तीन सालों में घरों की बिक्री का अनुमानित समय घटकर सिर्फ 22 महीने रह गया है जबकि साल 2019 के अंत तक यह समय 32 महीने था. इस आंकड़े को देखकर यह नहीं नकारा जा सकता है कि पिछली आठ तिमाहियों में घरों की डिमांड काफी जोर का इजाफा देखने को मिला है. यह रिपोर्ट, पिछले दो साल की बिक्री दर को देखने के बाद सामने आई है. इन आंकड़ों में सिर्फ अपार्टमेंट फ्लैट ही शामिल किए गए हैं. इसमें भूखंड पर बने घर, विला और भूखंड विकास को विश्लेषण से बाहर रखा गया है.