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कई औलादें फिर भी क्या पूरी संपत्ति एक ही बच्चे के नाम हो सकती है? जानिए कानून

माता-पिता अपनी स्व-अर्जित संपत्ति को वसीयत या वैध रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए किसी एक बेटे या बेटी के नाम कर सकते हैं. लेकिन पैतृक या संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में दूसरे हकदारों के अधिकार भी होते हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
कई औलादें फिर भी क्या पूरी संपत्ति एक ही बच्चे के नाम हो सकती है? जानिए कानून
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: माता-पिता के पास अगर एक से ज्यादा बच्चे हैं, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या वे अपनी पूरी संपत्ति सिर्फ एक बेटे या बेटी के नाम कर सकते हैं. इसका सीधा जवाब यह है कि यह संपत्ति के प्रकार पर निर्भर करता है. स्व-अर्जित संपत्ति और पैतृक संपत्ति के लिए कानून अलग-अलग है. इसलिए संपत्ति ट्रांसफर करने से पहले यह समझना जरूरी है कि संपत्ति किस श्रेणी में आती है.

अगर संपत्ति माता-पिता ने खुद कमाई है या अपने पैसे से खरीदी है, तो सामान्य तौर पर उस पर उनका पूरा अधिकार होता है. वे अपनी इच्छा के अनुसार वसीयत बनाकर किसी एक बेटे या बेटी को संपत्ति दे सकते हैं. वे चाहें तो जीवनकाल में रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए भी संपत्ति किसी एक बच्चे के नाम ट्रांसफर कर सकते हैं.

क्या कहता है कानून?

स्व-अर्जित संपत्ति के मालिक माता-पिता कानूनी तरीके से वसीयत बनाकर अपनी पूरी संपत्ति किसी एक बच्चे के नाम कर सकते हैं. उनके निधन के बाद वसीयत के अनुसार संपत्ति का उत्तराधिकार हो सकता है. हालांकि अगर कोई वारिस यह साबित कर दे कि वसीयत दबाव, धोखाधड़ी या गलत मानसिक स्थिति में बनाई गई थी, तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

कैसे मिल सकता है मालिकाना हक?

माता-पिता अपनी स्व-अर्जित संपत्ति किसी एक बेटे या बेटी को गिफ्ट करना चाहते हैं, तो रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड का रास्ता अपना सकते हैं. वैध तरीके से गिफ्ट डीड पूरी होने के बाद संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्तकर्ता के पास जा सकता है. हालांकि धोखाधड़ी, दबाव या कानून का उल्लंघन होने पर ऐसी डीड को चुनौती दी जा सकती है.

पैतृक संपत्ति का क्या है मामला?

पैतृक या संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में सभी योग्य सहदायिकों के अधिकार होते हैं. हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को भी बेटे के बराबर सहदायिक अधिकार प्राप्त है. इसलिए केवल माता-पिता की इच्छा के आधार पर पैतृक संपत्ति को एक ही बच्चे के नाम करना हमेशा संभव नहीं होता. दूसरे हकदार अपने हिस्से के लिए कानूनी दावा कर सकते हैं.

क्या शादी के बाद भी बेटी का है अधिकार?

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार मिला है. बेटी की शादी हो जाने से उसका सहदायिक अधिकार खत्म नहीं होता. इसलिए संपत्ति के बंटवारे में विवाहित बेटी के अधिकार को भी ध्यान में रखना जरूरी है.