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रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने हो सकती है 17,000 रुपये की कमाई, पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम बदल सकती है जिंदगी

पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित निवेश का विकल्प है. इसमें 5 साल की अवधि, हर तीन महीने ब्याज भुगतान, 30 लाख रुपये तक निवेश और धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने हो सकती है 17,000 रुपये की कमाई, पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम बदल सकती है जिंदगी
Courtesy: Pinterest (Representative image)

नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग ऐसी निवेश योजना की तलाश करते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और नियमित आय भी मिलती रहे. ऐसे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम यानी SCSS एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है. यह केंद्र सरकार की स्मॉल सेविंग्स स्कीम है, जिसमें निवेश पर सरकार की गारंटी होती है. इसी वजह से वरिष्ठ नागरिक इसे सुरक्षित निवेश के रूप में पसंद करते हैं.

इस योजना की मैच्योरिटी अवधि 5 साल है. इस दौरान निवेशकों को हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है. इससे नियमित अंतराल पर आय मिलती रहती है, जो रिटायरमेंट के बाद दैनिक खर्च पूरे करने में मददगार हो सकती है. मैच्योरिटी पूरी होने के बाद खाते को तय नियमों के अनुसार 3 साल के लिए आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

क्या हैं नियम?

अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी से पहले खाता बंद करता है, तो पोस्ट ऑफिस के नियमों के अनुसार उस पर पेनल्टी लग सकती है. इसलिए इस योजना में निवेश करने से पहले सभी शर्तों को समझ लेना जरूरी है.

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम में न्यूनतम 1000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है. वहीं अधिकतम 30 लाख रुपये तक निवेश की अनुमति है. यह सीमा सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार तय की गई है. इस योजना में मिलने वाली ब्याज दर कई बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक मानी जाती है, इसलिए यह वरिष्ठ नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय है.

निवेशकों को और क्या मिलता है लाभ?

पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले निवेशकों को आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ भी मिल सकता है. इससे सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स बचाने का फायदा भी मिलता है.

कितना मिलता है ब्याज?

अगर कोई दंपति जॉइंट अकाउंट के जरिए 25 लाख रुपये निवेश करता है, तो मौजूदा ब्याज दर के अनुसार हर तीन महीने में करीब 51,250 रुपये ब्याज मिल सकता है. इसका औसत हर महीने 17,000 रुपये से अधिक बैठता है. हालांकि ब्याज का भुगतान हर महीने नहीं बल्कि हर तिमाही किया जाता है. इसलिए 17,000 रुपये प्रतिमाह की आय का मतलब मासिक औसत आय है.

5 साल की अवधि पूरी होने पर निवेश की गई मूल राशि वापस मिल जाती है. इसके बाद निवेशक चाहें तो उसी राशि को दोबारा इस योजना या किसी अन्य निवेश विकल्प में लगा सकते हैं. सुरक्षित निवेश, नियमित ब्याज और सरकारी गारंटी के कारण SCSS रिटायरमेंट के बाद आय का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है.