भारत आज भी गांव का देश कहा जाता है, देश की लगभग 65 से 70 प्रतिशत आबादी अभी भी गांव में रहती है. लेकिन लोग तेजी से शहर की ओर भाग रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि शहर में काफी व्यवस्था मिलती है. कंपनियों में काम करने वाले लोगों को को हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस मिलती है. वहीं गांव में खेती करने वाले किसानों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है.
खेतों में भी काम करना आसान नहीं होता, जरा सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का रूप ले लेती है. कभी किसान ट्रैक्टर या मशीन की चपेट में आ जाते हैं या फिर कभी कोई जहरीला जीव हमला कर देता है. लेकिन ऐसे में कोई भी उनकी आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आता और पूरे परिवार पर मानसिक और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है. इन सभी परेशानियों को देखते हुए राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना शुरू की है.
मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई एक ऐसी योजना है जो किसानों को दुर्घटना के बाद आर्थिक सुरक्षा देती है. जिससे किसी भी मुश्किल समय में किसान के परिवार वालों को आर्थिक सहायता मिल सके. ऐसे में सभी किसानों को इस योजना के बारे में पता होना काफी जरूरी है.
बता दें कि इस योजना के तहत खेत में काम करने वाले उन किसानों को अधिकतम 2 लाख रुपये की सहायता दी जाती है, जिनके साथ खेत में काम करते वक्त दुर्घटना हो गई है. वहीं इस योजना के तहत चोट लगने पर भी आर्थिक मदद करने का प्रावधान है.
इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदकों के पास कुछ जरूरी दस्तावेज होना चाहिए. इन जरूरी दस्तावेजों में दुर्घटना का एफआईआर की प्रति, रोजनामचा, मेडिकल प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और जमीन से जुड़े कुछ दस्तावेज शामिल हैं. इसके अलावा बैंक विवरण भी होना जरूरी है, ताकि सभी दस्तावेजों और हादसे की पुष्टि के बाद किसान के खाते में पैसे भेजे जा सकें.
आवेदक को अपने इन सभी दस्तावेजों को लेकर ई-मित्र केंद्र पर जाकर, आवेदन करना होगा. आवेदन सबमिट करने के बाद रसीद प्राप्त करना जरूरी है. इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को दुर्घटना होने के 60 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी है, वहीं कुछ मामलों में केवल 15 दिनों का समय होता है.