नई दिल्ली: कई बार भागदौड़ के बीच कार या बाइक का इंश्योरेंस रिन्यू कराना याद नहीं रहता. कुछ लोगों को पॉलिसी खत्म होने का पता तब चलता है, जब उन्हें अचानक बीमा की जरूरत पड़ती है. लेकिन तारीख निकल जाने के बाद वाहन चलाना सिर्फ बीमा का मामला नहीं रहता, बल्कि आर्थिक और कानूनी परेशानी भी खड़ी कर सकता है. सबसे अहम बात यह है कि पुरानी पॉलिसी खत्म होने के बाद उसका सुरक्षा कवच अपने आप जारी नहीं रहता.
मोटर इंश्योरेंस की अवधि समाप्त होने के साथ ही पॉलिसी में गैप आ जाता है. इसका मतलब है कि पॉलिसी खत्म होने के बाद होने वाली दुर्घटना के लिए पुराना बीमा कवर उपलब्ध नहीं रहेगा. दोबारा बीमा कराने की प्रक्रिया में कंपनी वाहन का निरीक्षण कर सकती है. इसलिए नई पॉलिसी सक्रिय होने तक कार या बाइक को सड़क पर ले जाने से बचना चाहिए.
पॉलिसी की तारीख निकलते ही नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी तुरंत खत्म नहीं होता. दिए गए नियमों के अनुसार, व्यापक मोटर बीमा पॉलिसी 90 दिनों से ज्यादा समय तक समाप्त रहने पर जमा हुआ एनसीबी खत्म हो सकता है. एनसीबी उन पॉलिसीधारकों को मिलता है, जिन्होंने बीमा अवधि में कोई दावा नहीं किया हो. लगातार क्लेम-फ्री रहने पर यह ओन-डैमेज प्रीमियम पर 20 से 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
मोटर इंश्योरेंस के प्रीमियम भुगतान के लिए ऐसा कोई सामान्य ग्रेस पीरियड नहीं है, जिसमें पॉलिसी खत्म होने के बाद भी पुराना बीमा कवर जारी माना जाए. इसलिए आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते पॉलिसी रिन्यू कराना बेहतर है. इससे कवरेज में गैप बनने की स्थिति से बचा जा सकता है और अचानक वाहन चलाने की जरूरत पड़ने पर बीमा को लेकर परेशानी नहीं होगी.
भारत में वाहन के लिए वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है. अगर आपकी पॉलिसी खत्म हो चुकी है और वाहन के पास वैध थर्ड-पार्टी कवर नहीं है, तो सड़क पर वाहन चलाने से कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है. इसलिए सिर्फ अपनी कार या बाइक के नुकसान के बारे में सोचना पर्याप्त नहीं है. सड़क पर निकलने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि वाहन का अनिवार्य बीमा वैध है या नहीं.
अगर आपकी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी पहले ही खत्म हो चुकी है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी से संपर्क करें. कंपनी की प्रक्रिया के अनुसार वाहन का निरीक्षण कराना पड़ सकता है. इसके बाद नई पॉलिसी जारी होने और उसके सक्रिय होने की पुष्टि करें. जब तक वैध बीमा कवर शुरू न हो जाए, वाहन चलाने से बचना बेहतर है. थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान और अनावश्यक कानूनी परेशानी से बचा सकती है.