नो पार्किंग चालान लगने के बाद गाड़ी टो हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. नो पार्किंग नियम तोड़ने पर यातायात पुलिस वाहन को क्रेन से उठाकर तय स्थान पर ले जा सकती है. ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को पहले यह पता करना चाहिए कि गाड़ी किस स्थान पर रखी गई है. इसके बाद जरूरी कागजात साथ लेकर निर्धारित यातायात केंद्र पहुंचें और चालान तथा क्रेन शुल्क जमा करें. भुगतान की रसीद लेना भी बेहद जरूरी है.
गाड़ी जिस जगह खड़ी की थी, वहां वापस जाकर आसपास देखें. कई बार यातायात पुलिस वाहन हटाने के बाद सड़क पर वाहन का नंबर या नजदीकी यातायात केंद्र की जानकारी लिख देती है. अगर वहां कोई जानकारी नहीं मिलती है तो यातायात पुलिस की आधिकारिक सहायता सेवा पर संपर्क करें. गाड़ी का पंजीकरण नंबर बताकर उसके बारे में जानकारी ली जा सकती है.
वाहन को वापस लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखना बेहतर है. इनमें मुख्य रूप से ये कागजात शामिल हैं:
डिजिटल पंजीकरण प्रमाण पत्र और बीमा की प्रति भी कई जगह स्वीकार की जा सकती है. हालांकि, स्थानीय यातायात पुलिस के नियम अलग हो सकते हैं.
नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने पर जुर्माने की राशि हर शहर में एक जैसी नहीं होती. वाहन का प्रकार और स्थानीय नियमों के अनुसार चालान की रकम अलग हो सकती है. इसके अलावा वाहन को क्रेन से उठाकर ले जाने का शुल्क भी लिया जा सकता है. इसलिए केवल चालान की रकम नहीं, बल्कि वाहन हटाने का शुल्क भी जमा करना पड़ सकता है.
वाहन वापस लेते समय उसे अच्छी तरह जांचना जरूरी है. खासकर आगे और पीछे का हिस्सा, शीशे, पहिए, दरवाजे और दूसरी बाहरी चीजों को ध्यान से देखें. अगर टो करने के दौरान वाहन में नया नुकसान हुआ है, तो उसकी तस्वीर और वीडियो तुरंत बना लें. इसके बाद संबंधित यातायात अधिकारी या यार्ड प्रभारी को लिखित शिकायत दें.
जरूरत पड़ने पर वाहन मालिक संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भी शिकायत रख सकता है. नुकसान की स्थिति में शिकायत के साथ तस्वीरें, वीडियो और वाहन की पहले की स्थिति से जुड़े प्रमाण रखना उपयोगी हो सकता है.
नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने से बचना ही सबसे आसान तरीका है. सड़क पर वाहन छोड़ने से पहले आसपास लगे संकेतक और पार्किंग के नियम जरूर देखें. अगर वाहन टो हो जाए तो पुलिस से बहस करने के बजाय पहले सही जगह की जानकारी लें, जरूरी दस्तावेज लेकर जाएं और यातायात चालान तथा लागू क्रेन शुल्क का आधिकारिक भुगतान करें. इस तरह वाहन वापस लेने की प्रक्रिया आसान हो सकती है.