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मिडिल ईस्ट तनाव के कारण LPG की किल्लत, PNG वालों को अब भी जीरो टेंशन; जानें दोनों में अंतर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी वालों की समस्या बढ़ गई है. वहीं पीएनजी वालों को अभी भी राहत है. आइए डानते हैं दोनों में क्या अंतर है.

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Edited By: Shanu Sharma
मिडिल ईस्ट तनाव के कारण LPG की किल्लत, PNG वालों को अब भी जीरो टेंशन; जानें दोनों में अंतर
Courtesy: ANI

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस संघर्ष में स्टेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही रुक जाने से यह समस्या बढ़ गई है. भारत में 60 प्रतिशत से ज्यादा एलपीजी आयात होता है और इसमें से ज्यादातर मिडिल ईस्ट से आते है. 

एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण घरों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में हाहाकार मचा गया है. सोशल मीडिया पर लोग अपनी परेशानी बता रहे हैं. सिलेंडर लेने के लिए लोग लंबी-लंबी लाइने लगा रहे हैं और इसके दाम भी बढ़ा दिए गए हैं.

क्या होता है LPG?

LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस, यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन से बनती है. कच्चे तेल की रिफाइनिंग और प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग से निकलती है. इसे तरल रूप में दबाव डालकर सिलेंडर में भरा जाता है. सिलेंडर आसानी से ट्रांसपोर्ट होते हैं, इसी वजह से गांव-शहर हर जगह इसका इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर सप्लाई रूक गए हैं, जिसके कारण होटल बंद होने की कगार पर हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि एलपीजी के अलावा पीएनजी की मदद से भी खाना बनता है. आइए जानते हैं इन दोनों में क्या अंतर है. 

पीएनजी क्या है और कैसे काम करती है?

पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस, यह मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है. इसे जमीन के नीचे बिछी पाइपलाइनों की मदद से सीधे घरों, रेस्टोरेंट्स और उद्योगों तक पहुंचाया जाता है. यह बिल्कुल पानी के कनेक्शन की तरह काम करती है. इसके इस्तेमाल को मापने के लिए मीटर का इस्तेमाल किया जाता है. उपयोग के हिसाब से इसके बिल आते हैं. वहीं अगर एलपीजी की बात करें तो इसमें प्रोपेन-ब्यूटेन का मिश्रण होता है.

अगर दोनों के बीच के अंतर की बात करें तो एलपीजी भारी होती है. रिसाव होने पर आग लगने का खतरा ज्यादा  होता है. वहीं पीएनजी हवा से हल्की होती है. अगर यह लीक होता भी है तो ऊपर उठकर हवा में मिल जाती है. इसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है. पीएनजी लंबे समय में सस्ती पड़ती है, कीमतें स्थिर रहती हैं. ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव का कम असर होता है. साथ ही पर्यावरण के लिए भी बेहतर होता. एलपीजी की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैस निकलती है