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India Daily

आजादी के बाद बंगाल में सबसे बड़ी वोटिंग, 92% पार turnout ने बदल दी चुनावी तस्वीर, किसके पक्ष में गया जनता का साइलेंट फैसला?

पश्चिम बंगाल में इस बार मतदान ने इतिहास रच दिया है. दोनों चरणों में 92% के आसपास वोटिंग दर्ज हुई, जो आज़ादी के बाद अब तक की सबसे ज्यादा है, और इससे सियासी हलचल तेज हो गई है.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma
आजादी के बाद बंगाल में सबसे बड़ी वोटिंग, 92% पार turnout ने बदल दी चुनावी तस्वीर, किसके पक्ष में गया जनता का साइलेंट फैसला?
Courtesy: Credit: OpenAi

पश्चिम बंगाल में इस बार का चुनाव रिकॉर्ड बनाने वाला साबित हुआ. दोनों चरणों में जबरदस्त मतदान देखने को मिला. चुनाव आयोग के अनुसार, यह आज़ादी के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत है. लोगों ने बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लिया. यह आंकड़ा न सिर्फ राज्य, बल्कि पूरे देश के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है. इससे साफ है कि जनता इस बार बेहद सक्रिय रही.

चुनाव आयोग ने क्या कहा

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि यह “चुनाव का पर्व, पश्चिम बंगाल का गर्व” है. उनके अनुसार दोनों चरणों में रिकॉर्ड मतदान हुआ है. इस बयान ने चुनावी माहौल को और उत्साहित कर दिया. आयोग ने इसे लोकतंत्र की मजबूती का संकेत माना है.

दोनों चरणों में भारी मतदान

पहले चरण में 23 अप्रैल को 91.78% वोटिंग हुई थी. वहीं दूसरे और अंतिम चरण में 29 अप्रैल को 91.71% मतदान दर्ज किया गया. यह आंकड़े दिखाते हैं कि दोनों चरणों में लोगों का उत्साह लगभग समान रहा. इतनी बड़ी संख्या में वोटिंग होना एक बड़ा संकेत है. इससे चुनावी नतीजों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है.

TMC बनाम BJP की सीधी टक्कर

इस चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है. दोनों पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं. ज्यादा वोटिंग ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. दोनों दल इसे अपने पक्ष में जा रहा बता रहे हैं. इससे सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है.

वोटिंग प्रतिशत बना बड़ा मुद्दा

इतना ज्यादा मतदान अब खुद एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. हर पार्टी इसे अपने समर्थन के तौर पर पेश कर रही है. विश्लेषकों का मानना है कि हाई वोटिंग अक्सर बदलाव का संकेत देती है. लेकिन कई बार यह सत्ताधारी दल के पक्ष में भी जा सकती है. यही कारण है कि इस बार परिणाम को लेकर कोई भी स्पष्ट अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा है.

कितने मतदाताओं ने किया मतदान

अंतिम चरण में करीब 2.22 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र थे. इनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या शामिल थी. यह आंकड़ा बताता है कि चुनाव कितना बड़ा और महत्वपूर्ण था. इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है। इससे यह भी साफ है कि लोग अपने अधिकार को लेकर जागरूक हैं.

कौन-कौन सी सीटें चर्चा में

दूसरे चरण में भवानीपुर और टॉलीगंज जैसी सीटों पर खास नजर रही. ये इलाके पहले भी राजनीतिक रूप से काफी अहम रहे हैं. 2021 के चुनाव में यहां ममता बनर्जी की पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था. इस बार भी इन सीटों पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है. इनका असर पूरे चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है.

बीजेपी और टीएमसी की रणनीति

बीजेपी इस चुनाव में शहरी वोटरों और खास समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. वहीं टीएमसी अपने गढ़ को बचाने और लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है. दोनों पार्टियों ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है. हाई वोटिंग ने इस मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया है.

अब नजर नतीजों पर

मतदान खत्म होने के बाद अब सबकी नजर एग्जिट पोल और अंतिम नतीजों पर टिकी है. रिकॉर्ड वोटिंग ने चुनाव को और अनिश्चित बना दिया है. यह तय है कि इस बार का फैसला चौंकाने वाला हो सकता है. जनता ने बड़ी संख्या में वोट देकर अपना संदेश दे दिया है, अब देखना है कि यह संदेश किसके पक्ष में जाता है.