सर्दियों में कोहरा और कम धूप होने के कारण सोलर पैनल से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में अगर आप घर पर सोलर सिस्टम लगवाने की योजना बना रहे हैं तो सबसे जरूरी है कि सिस्टम की क्षमता आपकी बिजली खपत के हिसाब से हो. खासकर गीजर, हीटर और पानी की मोटर जैसे उपकरणों के इस्तेमाल से सर्दियों में बिजली की मांग बढ़ सकती है.
सर्दियों में धूप का समय कम होने और कोहरे के कारण सोलर पैनल का बिजली उत्पादन सामान्य दिनों की तुलना में कम हो सकता है. दिए गए अनुमान के मुताबिक उत्पादन करीब 10 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है. इसलिए सिस्टम की क्षमता तय करते समय सिर्फ सामान्य मौसम की बिजली जरूरत को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है.
1 KW का सोलर सिस्टम सर्दियों में करीब 3 से 4 यूनिट बिजली रोजाना पैदा कर सकता है. इस हिसाब से महीने में लगभग 90 से 120 यूनिट बिजली बनने की संभावना है.
यह सिस्टम उन घरों के लिए ठीक हो सकता है जहां टीवी, पंखे और लाइट जैसे सामान्य उपकरणों का इस्तेमाल होता है. हालांकि, अगर घर में गीजर या हीटर जैसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण नियमित रूप से चलते हैं तो 1 KW सिस्टम पर्याप्त नहीं हो सकता.
3 KW का सोलर सिस्टम सर्दियों में करीब 9 से 12 यूनिट बिजली प्रतिदिन पैदा कर सकता है. यानी महीने में लगभग 270 से 360 यूनिट बिजली बनने की संभावना है.
यह सिस्टम ऐसे घरों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे उपकरणों के साथ कभी-कभी गीजर या हीटर का इस्तेमाल भी किया जाता है.
जिन घरों में बिजली से चलने वाले उपकरण ज्यादा हैं, वहां 5 KW का सिस्टम लगाया जा सकता है. सर्दियों में इससे करीब 15 से 20 यूनिट बिजली रोजाना पैदा होने का अनुमान है. यानी महीने में लगभग 450 से 600 यूनिट बिजली बन सकती है.
अगर घर में गीजर, पानी की मोटर और हीटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा होता है तो 5 KW सिस्टम अधिक क्षमता वाला विकल्प हो सकता है.
सोलर सिस्टम की क्षमता तय करने से पहले घर की औसत बिजली खपत देखना जरूरी है. सिर्फ सर्दियों में कितनी यूनिट बिजली चाहिए, यह देखने के बजाय सालभर की खपत और इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए.
अगर घर में केवल सामान्य घरेलू उपकरण चलते हैं तो कम क्षमता वाला सिस्टम पर्याप्त हो सकता है. वहीं, गीजर और हीटर जैसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण नियमित रूप से चलाने हैं तो ज्यादा क्षमता वाले सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है. साथ ही, वास्तविक उत्पादन स्थान, मौसम, पैनल की दिशा और छत पर मिलने वाली धूप के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.