CNG Hydrotest Certificate: अगर आपकी गाड़ी CNG से चलती है, तो अगली बार पंप पर जाने से पहले एक जरूरी दस्तावेज जरूर जांच लें. दिल्ली-एनसीआर में IGL के CNG स्टेशनों पर बिना वैध हाइड्रो टेस्टिंग सर्टिफिकेट वाले वाहनों में CNG भरने पर रोक लगा दी गई है. यानी अगर आपके सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग की अवधि खत्म हो चुकी है या उसका वैध प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तो पंप पर आपको परेशानी हो सकती है.
CNG सिलेंडर में गैस काफी अधिक दबाव में भरी जाती है. लगातार इस्तेमाल के कारण समय के साथ सिलेंडर की मजबूती प्रभावित हो सकती है. इसी वजह से पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन की व्यवस्था के तहत सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग हर तीन साल में कराना जरूरी है. इसके बावजूद कई वाहन मालिक इस जांच को नजरअंदाज कर देते हैं. अब पंपों पर तकनीकी जांच के जरिए ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है.
IGL के CNG स्टेशनों पर लगाए गए ऑटोमेटेड व्हीकल रिकग्निशन सिस्टम में कैमरे वाहन की नंबर प्लेट रिकॉर्ड करते हैं. इसके बाद AI आधारित व्यवस्था उपलब्ध जानकारी के आधार पर CNG सिलेंडर की वैधता जांचती है. अगर सिलेंडर एक्सपायर्ड मिलता है, तो स्टेशन पर लगी LED स्क्रीन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए अलर्ट दिया जाता है. ऐसी स्थिति में वाहन में CNG नहीं भरी जाती.
अगर आपने सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग करा ली है, लेकिन सर्टिफिकेट आपके पास नहीं है, तो इसे फोन से ऑनलाइन निकाला जा सकता है. इसके लिए online.peso.gov.in पर जाएं और Search CNG Certificate By Vehicle No विकल्प चुनें. फिर वाहन नंबर का सही फॉर्मेट चुनकर रजिस्ट्रेशन नंबर, मालिक का पूरा नाम और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भरें. इसके बाद कैप्चा पूरा करके Continue पर क्लिक करें.
जानकारी भरने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा. OTP और कैप्चा दर्ज करने के बाद View Report विकल्प पर क्लिक करें. वेरिफिकेशन पूरा होने पर आपकी गाड़ी के CNG सिलेंडर का टेस्ट सर्टिफिकेट स्क्रीन पर दिखाई देगा. इसे PDF के रूप में फोन में सेव किया जा सकता है, ताकि CNG स्टेशन पर जरूरत पड़ने पर दस्तावेज दिखाया जा सके.