नई दिल्ली: आजकल लोग अपनी कार को स्टाइलिश और अलग दिखाने के लिए विंडस्क्रीन, पीछे के शीशे और बॉडी पर तरह तरह के स्टिकर लगाते हैं. लेकिन हर तरह का स्टिकर लगाना नियमों के हिसाब से सही नहीं है. खासकर ऐसा स्टिकर जो ड्राइवर की नजर या कार के शीशे की विजिबिलिटी को प्रभावित करता है, उस पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर सकती है.
मोटर वाहन नियमों के अनुसार कार के शीशों से पर्याप्त दृश्यता बनाए रखना जरूरी है. फ्रंट और रियर विंडस्क्रीन में कम से कम 70 प्रतिशत और साइड विंडो में कम से कम 50 प्रतिशत विजिबिलिटी होनी चाहिए. इसलिए अगर कोई बड़ा स्टिकर शीशे के ऐसे हिस्से पर लगा है जिससे ड्राइवर को आगे या पीछे देखने में परेशानी होती है, तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है.
ऐसे स्टिकर सड़क सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं. इसी कारण वाहनों के शीशों पर ऐसी चीजें लगाने से बचने की सलाह दी जाती है जो दृश्यता कम करती हों.
शीशे की विजिबिलिटी प्रभावित करने वाले बदलाव पर मोटर वाहन कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि चालान की सटीक राशि संबंधित राज्य के नियम, उल्लंघन की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधान पर निर्भर करती है. इसलिए हर मामले में 500 से 2000 रुपये या 5000 रुपये का एक जैसा जुर्माना तय नहीं माना जा सकता. पुलिस जरूरत पड़ने पर चालक को स्टिकर हटाने के लिए भी कह सकती है.
कई वाहनों पर प्रेस, एडवोकेट, पुलिस, आर्मी या सरकारी विभागों से जुड़े पहचान वाले स्टिकर देखने को मिलते हैं. अगर कोई व्यक्ति उस पेशे या विभाग से जुड़ा नहीं है और फिर भी ऐसा स्टिकर लगाकर खुद को अधिकारी या किसी विशेष वर्ग से जुड़ा दिखाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
अगर ऐसे फर्जी पहचान वाले स्टिकर का इस्तेमाल पुलिस जांच से बचने या किसी अनुचित सुविधा का लाभ लेने के लिए किया जाता है, तो मामला केवल ट्रैफिक चालान तक सीमित नहीं रह सकता. संबंधित कानूनों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव है.
कई राज्यों में वाहनों पर जातिसूचक, भड़काऊ या आपत्तिजनक संदेश लिखने वाले स्टिकर को लेकर पुलिस सख्ती करती है. ऐसे संदेश सार्वजनिक स्थानों पर विवाद और सामाजिक तनाव का कारण बन सकते हैं.
ऐसे मामलों में जुर्माने की राशि राज्य और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए कार पर किसी भी तरह का आपत्तिजनक या विवादित संदेश लगाने से बचना बेहतर है.
हर स्टिकर गैरकानूनी नहीं होता. वाहन से जुड़े जरूरी और अधिकृत स्टिकर, जैसे वैध फास्टैग और निर्धारित पहचान संबंधी स्टिकर, नियमों के अनुसार इस्तेमाल किए जा सकते हैं. सोसाइटी, कॉलेज या ऑफिस का वैध पार्किंग पास भी लगाया जा सकता है, लेकिन उसे इस तरह लगाना चाहिए कि ड्राइवर की विजिबिलिटी प्रभावित न हो.