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EMI कटती रही... घर नहीं मिला, अगर बिल्डर फ्लैट देने में कर रहा देरी तो RERA देता है ये अधिकार

फ्लैट की डिलीवरी में देरी होने पर होम लोन EMI और किराए का दोहरा बोझ उठाने वाले खरीदारों के पास कानूनी अधिकार हैं. RERA के अनुसार खरीदार रकम वापसी और ब्याज या प्रोजेक्ट में बने रहकर देरी की अवधि का ब्याज मांग सकता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
EMI कटती रही... घर नहीं मिला, अगर बिल्डर फ्लैट देने में कर रहा देरी तो RERA देता है ये अधिकार
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत में घर खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए जीवन का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला होता है. लेकिन जब बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो खरीदार की परेशानी काफी बढ़ जाती है. एक तरफ होम लोन की EMI चलती रहती है और दूसरी तरफ किराए के घर का खर्च भी उठाना पड़ सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर घर खरीदार के पास क्या कानूनी अधिकार हैं.

देश के रियल एस्टेट बाजार में प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कई खरीदारों को तय समय पर घर नहीं मिल पाता. प्रॉपइक्विटी के अनुसार, जुलाई 2024 तक देश के 42 शहरों में करीब 2 हजार आवासीय प्रोजेक्ट रुके हुए थे. इनमें करीब 5.08 लाख यूनिट शामिल थीं. 2018 में रुकी हुई यूनिट की संख्या करीब 4.65 लाख थी.

कौन-कौन से प्रोजेक्ट में है देरी?

देरी की समस्या केवल पूरी तरह रुके हुए प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है. कई ऐसे प्रोजेक्ट भी हैं, जहां निर्माण जारी रहने के बावजूद खरीदारों को तय समय से काफी देर बाद कब्जा मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन निर्माणाधीन घरों का अंततः कब्जा दिया जाता है, उनमें बड़ी संख्या में तीन से चार साल तक की देरी देखी जाती है.

EMI के साथ किराए का बोझ

फ्लैट की डिलीवरी में देरी होने पर खरीदार को आर्थिक नुकसान हो सकता है. अगर खरीदार किराए के मकान में रह रहा है, तो उसे किराया और होम लोन की EMI दोनों चुकानी पड़ सकती हैं. इसके अलावा घर खरीदने से जुड़ी वित्तीय योजना और टैक्स से मिलने वाले संभावित लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं.

खरीदार को क्या अधिकार है?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर बिल्डर ने बिक्री समझौते में तय तारीख तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया है, तो खरीदार के पास कानूनी उपाय मौजूद हैं. रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट, 2016 यानी RERA की धारा 18 खरीदार को महत्वपूर्ण अधिकार देती है.

अगर खरीदार प्रोजेक्ट से बाहर निकलना चाहता है, तो वह बिल्डर से भुगतान की गई रकम वापस मांग सकता है. इसके साथ लागू नियमों के अनुसार ब्याज और अन्य राहत का दावा भी किया जा सकता है.

दूसरा विकल्प यह है कि खरीदार प्रोजेक्ट में बना रहे. ऐसी स्थिति में कब्जा मिलने तक देरी की अवधि के लिए ब्याज की मांग की जा सकती है. हालांकि ब्याज की दर और राहत का निर्धारण संबंधित कानून, समझौते और मामले की परिस्थितियों के आधार पर होता है.

शिकायत कहां करें?

अगर बिल्डर बातचीत से समस्या का समाधान नहीं करता है, तो खरीदार संबंधित राज्य की RERA अथॉरिटी में शिकायत कर सकता है. मामले की परिस्थितियों के आधार पर उपभोक्ता आयोग या अन्य कानूनी मंच का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है. शिकायत करने से पहले बिक्री समझौता, भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट, बिल्डर से हुई बातचीत और कब्जे की तय तारीख से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है.