Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल यानी 23 जुलाई को सरकार के केंद्रीय बजट 2024 की घोषणा करने वाली हैं. एक दिन पहले यानी आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी.
वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में 16 जुलाई को हलवा सेरेमनी की शुरुआत के साथ बजट घोषणा की तैयारी शुरू हो गई थी. मंत्रालय के अनुसार, हलवा सेरेमनी बजट की तैयारी में शामिल अधिकारियों की 'लॉक-इन' प्रक्रिया से पहले किया जाता है. इस सेरेमनी में वित्त मंत्री बजट की तैयारी में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को पारंपरिक मिठाई खिलाती हैं और फिर सभी को मंत्रालय की बिल्डिंग के अंदर रखा जाता है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि बजट दस्तावेज़ लीक न हो.
आर्थिक सर्वेक्षण, बीते वित्तीय वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की व्यापक समीक्षा या वार्षिक रिपोर्ट होता है. इसे भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के मार्गदर्शन में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के इकोनॉमिक्स डिविजन की ओऱ से तैयार किया जाता है. इस साल का दस्तावेज मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.अनंथा नागेश्वरन की देखरेख में तैयार कि गया है.
इकोनॉमिक सर्वे का मतलब आसान शब्दों में सरकार का रिपोर्ट कार्ड होता है, जिसमें पिछले वित्त वर्ष का लेखा-जोखा होता है. सबसे पहले 1950-51 में इकोनॉमिक सर्वे पेश हुआ था. इसके बाद साल 1964 से इसे केंद्रीय बजट के एक दिन पहले पेश करने की परंपरा की शुरुआत हुई. इस इकोनॉमिक सर्वे से देश की जनता को देश की अर्थव्यवस्था की सही स्थिति का पता चलता है. साथ ही इसके जरिए सरकार देश के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में भी बताती है. साथ ही इन चुनौतियों को दूर करने के बारे में भी बताया जाता है. सर्वे से महंगाई, बेरोजगारी के आंकड़े भी होते हैं और इन्वेस्टमेंट, सेविंग औऱ खर्च का आइडिया भी मिलता है.
आर्थिक सर्वेक्षण, केंद्र सरकार के आर्थिक प्रदर्शन, प्रमुख विकास कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों के सारांश यानी समरी के रूप में कार्य करता है. इसके अलावा, ये आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक रोडमैप भी तैयार करता है. आर्थिक सर्वेक्षण दस्तावेज में दो पार्ट होते हैं - पहले पार्ट में देश के आर्थिक विकास और चुनौतियों, अर्थव्यवस्था की व्यापक समीक्षा शामिल होती है, जबकि दूसरे पार्ट में सामाजिक सुरक्षा, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मानव विकास और जलवायु जैसे विशिष्ट विषयों पर पिछले वित्तीय वर्ष का विश्लेषण करता है.
आर्थिक सर्वेक्षण दस्तावेज पिछले वित्तीय वर्ष में भारत के विकास की एक व्यापक समीक्षा है, जो सभी क्षेत्रों, उद्योगों, कृषि, रोजगार, कीमतों और निर्यात आदि के विस्तृत सांख्यिकीय आंकड़ों के विश्लेषण और उपलब्ध कराने पर आधारित होता है. ये अगले वित्तीय वर्ष के लिए एक प्राथमिकता सूची प्रदान करके बजट से पहले एक समग्र दृष्टिकोण देने में भी मदद करता है और ये भी बताता है कि किन क्षेत्रों को अधिक आवंटन, नीतिगत समर्थन और सरकारी कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी.
केंद्रीय बजट केंद्र सरकार का एक एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट है जो आगामी वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2024-25) - 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक के लिए प्रस्तावित व्यय और राजस्व की रूपरेखा प्रस्तुत करता है. आर्थिक सर्वेक्षण बजट से पहले जारी किया जाता है, जिसमें पिछले वर्ष का पूरा लेखा-जोखा पेश किया जाता है, साथ ही आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए गैर-बाध्यकारी सुझाव भी दिए जाते हैं. लेकिन बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की सरकार की उपलब्धियों का विवरण होता है और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए लक्ष्यों और आवंटनों की रूपरेखा होती है.
सर्वेक्षण दस्तावेज में पिछले वित्तीय वर्ष के आधार पर विश्लेषण, डेटा, अनुसंधान और सिफारिशें शामिल हैं, जबकि बजट का उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नीतियों, आवंटन और योजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करना है.
सर्वेक्षण पत्रकारों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए एक विस्तृत सांख्यिकीय रिपोर्ट के रूप में कार्य करता है, जबकि बजट इस अर्थ में अधिक व्यापक है कि यह आम आदमी और कॉर्पोरेट्स दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है.