वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को आम बजट पेश करेंगी. आम बजट में ही रेल बजट भी पेश किया जाएगा. पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता. 1924 से शुरू हुई रेल बजट पेश करने की अलग परंपरा का अंत साल 2017 में हो गया. 2017 से पहले केंद्र सरकार रेलवे के लिए अलग बजट पेश करती थी.
रेल बजट में साल भर के लिए रेलवे के लिए एक खाका तैयार किया जाता है. राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने और रेलवे नेटवर्क को और सुविधाजनक बनाने का रूपरेखा तैयार करता है. नई ट्रेनें, नए रूट और फेयर पर भी फैसला लिया जाता है.
23 जुलाई को केंद्रीय बजट भाषण के दौरान ही रेल बजट पेश की जाएगी. केंद्र सरकार ने साल 2016 में रेलवे बजट को केंद्रीय बजट में मिलाने का फैसला किया था. नीति आयोग की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार ने रेल बजट को केंद्रीय बजट में मर्ज कर दिया. मोदी सरकार ने सदियों से चली आ रही इस परंपरा को खत्म किया और साल 2017 में पहली बार रेल बजट, आम बजट के साथ पेश किया गया.
इस साल रेल बजट में कई नई ट्रेन का ऐलान किया जा सकता है. नॉन स्टाप एसी ट्रेन की घोषणा की जाएगी. साथ ही मौजूदा ट्रेन में कोचों की संख्या बढ़ाया जाएगा. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पर फोकस रहने वाला है. पिछले साल हुई रेल दुर्घटना ने लोगों मन में डर बैठाया है. रेल बजट में इस बात का जिक्र होगा. फरवरी 2024 में भारतीय रेलवे ने टिकट की कीमतें कोविड से पहले के स्तर पर ला दी थीं. विशेषज्ञों को आगामी बजट में भी इसी तरह के कदम की उम्मीद नहीं है.
भारतीय रेल देश की लाइफ लाइन हैं. करोड़ों लोग रोजना रेल सफर करते हैं. पिछले कुछ सालों के दौरान भारतीय रेलवे में बदलाव आए हैं. सरकारी खर्च का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से आता है. पिछले कुछ सालों में रेल बजट भी बढ़ाया गया है. वित्त वर्ष 2023-24 में रेलवे बजट 2.4 लाख करोड़ से अधिक था.