नई दिल्ली: अटल पेंशन योजना यानी APY को खास तौर पर उन लोगों के लिए अहम माना जाता है, जिनके पास बुढ़ापे के लिए नियमित पेंशन का दूसरा सहारा नहीं है. केंद्र सरकार की यह योजना असंगठित क्षेत्र के नागरिकों को 60 वर्ष की उम्र के बाद तय मासिक पेंशन देने का प्रावधान करती है. इसमें शामिल होने के लिए उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और आवेदक आयकर दाता नहीं होना चाहिए.
इस योजना में जुड़ने वाला व्यक्ति 60 साल की उम्र तक नियमित अंशदान करता है. कितनी रकम जमा करनी होगी, यह योजना शुरू करने की उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करता है. हाल ही में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एसएलबीसी और पीएफआरडीए ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में जागरूकता एवं नामांकन अभियान चलाया. इसका उद्देश्य पात्र लोगों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को योजना से जोड़ना है.
अटल पेंशन योजना का संचालन पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी PFRDA करता है और यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का हिस्सा है. योजना में शामिल व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद चुनी गई पेंशन पाने का पात्र होता है. इसके तहत 1,000, 2,000, 3,000, 4,000 और 5,000 रुपये की पांच निश्चित मासिक पेंशन श्रेणियां हैं. पेंशन की राशि व्यक्ति के योगदान के आधार पर तय होती है.
APY में खाता खोलने के लिए किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी है, जो आधार से जुड़ा हो. ऑनलाइन आवेदन के लिए बैंक की इंटरनेट बैंकिंग में जाकर Social Security Schemes या APY Registration विकल्प चुना जा सकता है. वहीं ऑफलाइन आवेदन के लिए संबंधित बैंक शाखा या डाकघर से फॉर्म लेकर जरूरी जानकारी और आधार की प्रति जमा करनी होती है. आवेदन स्वीकृत होने पर मोबाइल पर पुष्टि संदेश आता है.
योजना की अवधि खाताधारक के 60 वर्ष की उम्र पूरी होने तक रहती है. इसके बाद पेंशन पाने के लिए संबंधित बैंक शाखा या डाकघर में क्लेम आवेदन देना होता है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनी गई मासिक पेंशन खाते में जमा होने लगती है. यह पेंशन लाभार्थी के जीवित रहने तक जारी रहती है. यानी योजना का उद्देश्य बुढ़ापे में नियमित आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है.
सामान्य स्थिति में 60 वर्ष से पहले APY खाता बंद करने की अनुमति नहीं है. हालांकि खाताधारक की मृत्यु होने पर पेंशन या जमा राशि पति या पत्नी को दी जाती है. दोनों के न होने पर जमा कॉर्पस नामांकित व्यक्ति को मिलता है. गंभीर या जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए भी खाता समय से पहले बंद कर पैसा निकालने की अनुमति है. स्वैच्छिक बंद करने पर अंशदान और ब्याज मिलता है, जबकि सरकारी सह-अंशदान और उसका ब्याज वापस नहीं मिलता.