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BRICS 2026: अगर भारत, रूस और चीन ने मिला लिया हाथ तो अमेरिका का क्या होगा? पूरी कहानी समझिए

भारत, रूस और चीन अगर आर्थिक और रणनीतिक तौर पर बेहद करीब आते हैं, तो वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है. तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं, आबादी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता BRICS को मजबूत आधार देती हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
BRICS 2026: अगर भारत, रूस और चीन ने मिला लिया हाथ तो अमेरिका का क्या होगा? पूरी कहानी समझिए
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत, रूस और चीन के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी बनती है तो इसका असर केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा. चीन दुनिया का बड़ा विनिर्माण केंद्र है, रूस ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जबकि भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. इनकी ताकत एक साथ आने पर BRICS का वैश्विक प्रभाव काफी बढ़ सकता है. हालांकि भारत का रुख साफ है कि BRICS को पश्चिम के खिलाफ खड़ा करने के बजाय गैर-पश्चिमी देशों के सहयोग के मंच के रूप में देखा जाए.

भारत, रूस और चीन की आर्थिक ताकत को जोड़कर देखें तो इनके पास बड़ा बाजार, विशाल आबादी, ऊर्जा संसाधन और मजबूत उत्पादन क्षमता है. ऐसी स्थिति में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की कोशिशों को गति मिल सकती है. इससे डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक घटाने का रास्ता खुल सकता है. हालांकि किसी नई साझा मुद्रा की राह आसान नहीं है. BRICS के भीतर आर्थिक नीतियों और देशों के हितों में काफी अंतर है.

भारत-चीन के बीच सबसे बड़ी चुनौती

भारत के लिए चीन के साथ संबंध इस पूरी तस्वीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं. सीमा विवाद और वर्षों से चली आ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है. ऐसे में भारत किसी ऐसे समूह का हिस्सा नहीं बनना चाहेगा, जहां चीन का प्रभाव पूरी तरह हावी हो. भारत अमेरिका, यूरोप और जापान के साथ भी व्यापार और तकनीकी संबंध मजबूत कर रहा है. इसलिए उसकी नीति किसी एक शक्ति के साथ पूरी तरह खड़े होने की नहीं है.

रूस और चीन से अलग है भारत का रास्ता

BRICS के शुरुआती दौर में चीन और रूस के प्रभाव को काफी मजबूत माना जाता था. इसके बावजूद भारत ने लगातार इस मंच को संतुलित रखने की कोशिश की. भारत का मानना है कि BRICS को पश्चिम-विरोधी संगठन के बजाय गैर-पश्चिमी सहयोग मंच के रूप में आगे बढ़ना चाहिए. ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से भी इस सोच को समर्थन मिला. इसी वजह से BRICS में रहते हुए भारत अमेरिका के साथ भी अपने रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखता है.

BRICS में भारत की बढ़ती भूमिका

भारत ने BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने. भारत ने UPI, आधार और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल समाधानों को भी वैश्विक मंच पर सामने रखा है. BRICS के विस्तार में भारत ने संतुलित सदस्यता पर जोर दिया. इंडोनेशिया का जुड़ना भी संगठन के विस्तार का हिस्सा है. वहीं अमेरिका BRICS में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क है, जबकि भारत समूह के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.