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अब AI बताएगा कब होगी मृत्यु! सामने आई चौंकाने वाली रिसर्च

क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा टूल भी है जो यह अनुमान लगा सकता है कि आपकी मृत्यु कब होगी. इसे लेकर एक टीम ने रिसर्च की है. चलिए जानते हैं इस बारे में.

Shilpa Srivastava
अब AI बताएगा कब होगी मृत्यु! सामने आई चौंकाने वाली रिसर्च

हाइलाइट्स

  • आ गया नया AI टूल
  • बताएगा व्यक्ति का लाइफस्पैन

कई लोग ऐसे हैं जो अपने जीवन के बारे में काफी कुछ जानना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वो अपने फ्यूचर को प्लान कर सकते हैं. एक ChatGPT जैसा ही AI टूल काफी लोकप्रिय हो रहा है जो यूजर्स को यह बताता है कि उनकी मौत कब होगी. एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसमें एक रिसर्च के बारे में बताया गया है. 

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि एक ऐसा AI टूल है जिसे लेकर यह दावा किया गया है कि वो किसी भी व्यक्ति की मौत का दिन बता सकता है. इस टूल को सुने लेहमन ने डेवलप किया है. यह डेनमार्क की टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं. इस नई एल्गोरिदम का नाम life2vec है. यह करीब 78 फीसद सटीक है और अनुमान लगाने के लिए व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे उसकी सैलरी, नौकरी, घर और हेल्थ हिस्ट्री का इस्तेमाल करता है. 

जहां ChatGPT जॉब सर्च करने या फैशन च्वाइसेज के लिए लोगों की मदद करता है. वहीं, life2vec एक अलग ही राह पर काम करता है. यह लोगों की लाइफ डिटेल एनलाइज करता है. यह सिर्फ डेथ ही नहीं बल्कि लोगों की पर्सनैलिटी और दूसरे देश में रिलोकेट होने जैसे फैसले को भी बताता है. 

लेहमन की टीम ने 2008 से 2020 तक करीब 6 मिलियन Danish लोगों पर रिसर्च की. इस रिसर्च में life2vec से पूछा गया कि इनमें कौन-सा व्यक्ति 1 जनवरी 2016 के बाद कम से कम 4 साल तक जीवित रहेंगे. इसके लिए उन्होंने निजी जीवन के इवेंट्स को स्ट्रक्चर किया. AI ने स्ट्रक्चर्ड फॉर्मेट में पर्सनल डाटा को डाला जिसमें व्यक्ति के अलग-अलग लाइफ इवेंट के साथ उसके स्पेसिफिक कोड्स शामिल थे. इसका एक्यूरेसी रेट क्या रहा, ये जानते हैं. 

life2vec ने काफी हद सही बताया कि कौन-कौन 2020 तक गुजर चुके हैं. इसका एक्यूरेसी रेट 75 फीसद रहा. इस स्टडी के अनुसार, यहां उन बातों के बारे में भी बताया गया जो जल्दी मृत्यु का कारण बन सकते हैं जैसे पुरुष होना, मेंटल हेल्थ इश्यू होना या स्किल्ड जॉब होना. इससे अलग हाई-इनकम, लीडरशिप जैसी चीजें लंबी उम्र से जुड़ी थीं. 

लेहमन ने बताया कि रिसर्च में हिस्सा लेने वालों में से किसी को भी उनके अनुमानित जीवनकाल के बारे में नहीं बताया गया. यह टूल अभी लोगों के लिए तो उपलब्ध नहीं कराया गया है. लेहमन और उनकी टीम इसे लेकर और भी ज्यादा रिसर्च करने पर विचार कर रही हैं.