आज AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई, ऑफिस, रिसर्च और कंटेंट क्रिएशन से लेकर कोडिंग तक हर जगह इसका उपयोग बढ़ रहा है. ऐसे में यह सवाल भी अहम हो जाता है कि आखिर AI से एक सवाल पूछने में कितनी बिजली खर्च होती है और क्या इसका असर आपके बिजली बिल पर पड़ सकता है.
एक सामान्य AI क्वेरी का जवाब तैयार करने में लगभग 0.3 वॉट-आवर ऊर्जा खर्च होती है. यह मात्रा इतनी कम है कि इसे 5 मिनट तक एक एलईडी बल्ब जलाने से भी कम माना जा सकता है. यदि कोई उपयोगकर्ता दिनभर सामान्य सवाल पूछता है, तब भी उसके घर की बिजली खपत पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता. दरअसल, यह बिजली आपके घर से नहीं बल्कि उन विशाल डेटा सेंटरों से खर्च होती है, जहां AI मॉडल लगातार काम करते हैं. इसलिए AI का उपयोग करने से आपका बिजली बिल अचानक बढ़ने की चिंता नहीं करनी चाहिए.
AI की ऊर्जा खपत सवाल की लंबाई और जटिलता पर निर्भर करती है. यदि आप लगभग 7,500 शब्दों वाला लंबा जवाब तैयार कराते हैं, तो करीब 2.5 Wh ऊर्जा खर्च होती है. वहीं, 75,000 शब्दों जैसी बड़ी रिसर्च क्वेरी या विशाल कोडबेस प्रोसेस करने पर यह खपत बढ़कर लगभग 40 Wh तक पहुंच सकती है. इसकी वजह यह है कि बड़े दस्तावेज़ों को समझने और जवाब तैयार करने के लिए AI को कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़ती है, जिससे ऊर्जा की मांग भी बढ़ जाती है.
अगर तुलना करें तो लगभग 65 से 70 सामान्य AI सवाल पूछने में उतनी ही ऊर्जा खर्च होती है, जितनी एक 5000 mAh बैटरी वाले स्मार्टफोन को एक बार चार्ज करने में लगती है. वहीं, 40 Wh की बड़ी AI क्वेरी लगभग दो स्मार्टफोन चार्ज करने के बराबर ऊर्जा ले सकती है. एक घंटे टीवी देखने में लगभग 90 Wh बिजली खर्च होती है, जो करीब 300 सामान्य AI क्वेरी के बराबर है. इससे साफ है कि रोजमर्रा के छोटे AI सवाल ऊर्जा की दृष्टि से बहुत बड़े उपभोक्ता नहीं हैं.
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI का इस्तेमाल करते समय छोटे और स्पष्ट प्रॉम्प्ट लिखें, ताकि अनावश्यक प्रोसेसिंग से बचा जा सके. किसी भी AI प्लेटफॉर्म पर बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील डेटा साझा न करें. केवल भरोसेमंद और आधिकारिक AI सेवाओं का ही उपयोग करें. आने वाले समय में टेक कंपनियां अधिक ऊर्जा-कुशल AI मॉडल और ग्रीन डेटा सेंटर विकसित करने पर काम कर रही हैं, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भी कम किया जा सके.