लगातार तीन दिन तक बारिश और भूस्खलन की वजह से रुकी केदारनाथ यात्रा शुक्रवार सुबह दोबारा शुरू हो गई. जैसे ही प्रशासन ने यात्रा की अनुमति दी, सोनप्रयाग में रुके श्रद्धालुओं के चेहरे खिल उठे. 'हर.हर महादेव' और 'जय बाबा केदार' के जयघोषों के बीच यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से धाम के लिए रवाना किया गया. पहले चरण में करीब 800 श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से आगे भेजा गया. यात्रा शुरू होने के बावजूद प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है. पैदल मार्ग के कई हिस्सों में अभी भी भूस्खलन से आया मलबा हटाया जा रहा है. मौसम और रास्ते की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और परिस्थितियों के अनुसार ही आगे की आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी.
गुरुवार को भारी बारिश और पहाड़ियों से लगातार मलबा गिरने के कारण एहतियातन यात्रा रोक दी गई थी. इस दौरान श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और अन्य सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया. शुक्रवार सुबह मौसम में आंशिक सुधार और यात्रा मार्ग की समीक्षा के बाद प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी.
केदारनाथ पैदल मार्ग के कई हिस्सों में अभी भी मलबा और बोल्डर हटाने का काम जारी है. जेसीबी मशीनों के साथ संबंधित विभागों, डीडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार मार्ग को सुरक्षित बनाने में जुटी हैं. प्रशासन का कहना है कि पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही मार्ग पर सामान्य आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी.
रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है. नदी का पानी तटीय क्षेत्रों तक पहुंचने लगा है, जिससे कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं. बेलनी क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर तक भी पानी पहुंचने की सूचना है, जबकि कुछ संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं.
जिला प्रशासन ने लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया है. अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है. साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना देने को कहा गया है.
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा फिलहाल नियंत्रित तरीके से संचालित की जा रही है. यात्रियों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है. मौसम में किसी भी बदलाव की स्थिति में प्रशासन आवश्यक निर्णय लेगा, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे.