देहरादून: देशभर में पेपर लीक के मामलों के बीच अब उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी भी विवादों में आ गई है. यूनिवर्सिटी की दो सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया. प्रारंभिक जांच में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. साथ ही दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है.
मामले की शुरुआत 8 जुलाई को हुई, जब 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' विषय की परीक्षा समाप्त होने के बाद यूनिवर्सिटी को एक व्हिसलब्लोअर की ई-मेल मिली. शिकायत में दावा किया गया कि परीक्षा से पहले वॉट्सऐप ग्रुप पर साझा किए गए महत्वपूर्ण सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे. शिकायत मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच शुरू कर दी.
यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर गठित जांच समितियों ने पाया कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल छात्रों तक पहुंचाए. जांच में यह भी सामने आया कि 24 जून को हुई दूसरी परीक्षा के प्रश्नपत्र की गोपनीयता भी भंग हुई थी. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी.
प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' और 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी' दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इसका असर प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्रों पर पड़ा है. यूनिवर्सिटी ने घोषणा की है कि दोनों विषयों की परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएंगी. नई तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी जल्द जारी होगी.
परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. यूनिवर्सिटी ने उन्हें अगले सात वर्षों तक सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने आंतरिक जांच में आरोप सही मिलने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. यूनिवर्सिटी ने भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा की गोपनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी.