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India Daily

कांवड़ यात्रा में दिखी अनोखी मिसाल, कंधों पर गंगाजल के साथ बेटियों को बैठाकर दिया नारी सम्मान का संदेश

हरिद्वार से अलीगढ़ तक करीब 300 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पर निकले एक दंपती ने आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता का अनोखा उदाहरण पेश किया है. गंगाजल के साथ अपनी बेटी और भांजी को कांवड़ में बैठाकर यह परिवार बेटी बचाओ, बेटी सम्मान का संदेश दे रहा है.

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Edited By: Shanu Sharma
कांवड़ यात्रा में दिखी अनोखी मिसाल, कंधों पर गंगाजल के साथ बेटियों को बैठाकर दिया नारी सम्मान का संदेश
Courtesy: AI

हरिद्वार में श्रावणी कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार भक्ति के साथ सामाजिक सरोकारों की भी अनूठी झलक देखने को मिल रही है. लाखों शिवभक्त जहां गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं अलीगढ़ से आए एक दंपती ने अपनी कांवड़ यात्रा को समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का माध्यम बना दिया है. उनकी अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

अलीगढ़ जनपद के बिलखोरा गांव निवासी संजू बाबा अपनी कांवड़ के एक छोर पर मां गंगा का पवित्र जल और दूसरे छोर पर अपनी 10 वर्षीय भांजी को बैठाकर पैदल यात्रा कर रहे हैं. वहीं उनकी पत्नी बीना देवी भी अलग कांवड़ लेकर चल रही हैं, जिसमें एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर उनकी आठ वर्षीय पुत्री राधा बैठी हैं.

बेटियां सुरक्षित रहेंगी तो समाज सुरक्षित रहेगा

मिली जानकारी के मुताबिक दोनों पति-पत्नी हरिद्वार से अलीगढ़ तक लगभग 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल भगवान शिव का जलाभिषेक करना ही नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना भी है. संजू बाबा का कहना है कि बेटी ही सृष्टि का आधार है. यदि बेटियों को सम्मान और सुरक्षा मिलेगी, तभी समाज और संस्कृति भी मजबूत बने रहेंगे. उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध आज भी गंभीर चिंता का विषय हैं. ऐसे समय में प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि वह बेटियों को समान अधिकार, सम्मान और अच्छे संस्कार दे. उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही धर्म, सेवा, करुणा और नारी सम्मान की शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उनका मानना है कि समाज में नैतिक मूल्यों के कमजोर होने के कारण ही कई सामाजिक बुराइयां बढ़ रही हैं

पिछले वर्ष मां को कांवड़ में बैठाकर की थी यात्रा

संजू बाबा ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने अपनी वृद्ध मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से अलीगढ़ तक की यात्रा पूरी की थी. इस बार उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बेटी बचाओ, बेटी सम्मान का संदेश देने का संकल्प लिया है. उन्होंने बताया कि अपने गुरु बाबा मंगलनाथ की प्रेरणा से वह समाज सेवा और सनातन संस्कारों के प्रचार के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं. उनका मानना है कि यदि धार्मिक यात्राओं को सामाजिक जागरूकता से जोड़ा जाए तो उनका प्रभाव और भी व्यापक हो सकता है. इस अनोखी कांवड़ ने हरिद्वार में श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है और आस्था के साथ समाज को सकारात्मक संदेश देने की नई मिसाल पेश की है.