menu-icon
India Daily

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जागेश्वर मंदिर की प्रशंसा की, देखें वीडियो

सीएम धामी ने लिखा कि वृद्ध जागेश्वर मंदिर भगवान शिव की साधना और तपस्या का पवित्र केंद्र है. घने देवदार के जंगलों से घिरा यह मंदिर आध्यात्मिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसी स्थानीय मान्यता है.

antima
Edited By: Antima Pal
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जागेश्वर मंदिर की प्रशंसा की, देखें वीडियो
Courtesy: X

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद अल्मोड़ा स्थित प्राचीन वृद्ध जागेश्वर मंदिर के बारे में ट्वीट कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की है. उन्होंने इस पावन स्थल को भगवान शिव की तपोस्थली बताया और भक्तों को यहां आने का निमंत्रण दिया.

सीएम धामी ने लिखा कि वृद्ध जागेश्वर मंदिर भगवान शिव की साधना और तपस्या का पवित्र केंद्र है. घने देवदार के जंगलों से घिरा यह मंदिर आध्यात्मिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसी स्थानीय मान्यता है.

मुख्यमंत्री ने अपने अल्मोड़ा दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में आने वाले हर श्रद्धालु को इस प्राचीन मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए. उन्होंने ट्वीट के माध्यम से लोगों को देव भूमि उत्तराखंड के इस अनमोल धाम की ओर आकर्षित किया.

जागेश्वर मंदिर का महत्व

वृद्ध जागेश्वर मंदिर अल्मोड़ा जिले में स्थित है. यह 12वीं-13वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर माना जाता है. कत्यूरी राजवंश के समय में इसका निर्माण हुआ था. मंदिर परिसर में कई छोटे-बड़े शिव मंदिर हैं, जिनमें मुख्य मंदिर भगवान जागेश्वर (शिव) को समर्पित है. चारों ओर ऊंचे देवदार के पेड़ इस जगह को विशेष शांति प्रदान करते हैं.

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक है. गर्मियों में ठंडी हवा और शीतल वातावरण यहां आने वाले यात्रियों को आकर्षित करता है. मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां तपस्या की थी, इसलिए इसे तपोस्थली भी कहा जाता है.

आध्यात्मिक और प्राकृतिक अनुभव

जागेश्वर मंदिर घाटी में बसा है. आसपास बहती नदियां और हरे-भरे जंगल इस जगह को स्वर्ग जैसा बना देते हैं. भक्त सुबह-शाम यहां आरती में शामिल होते हैं. मंदिर में शांति का अनुभव हर किसी को गहराई से प्रभावित करता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आने के बाद मन में नई ऊर्जा का संचार होता है. दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाओं को लेकर आते हैं और विश्वास के साथ लौटते हैं.

सीएम का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने अपने ट्वीट में पर्यटन और आस्था दोनों को बढ़ावा देने की कोशिश की है. उत्तराखंड सरकार भी चारधाम यात्रा के साथ-साथ ऐसे छोटे-छोटे प्राचीन मंदिरों को पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास कर रही है. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और संस्कृति संरक्षित रहेगी.