उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इस बार चुनावी मुकाबले का सबसे अहम केंद्र युवा मतदाता बनते दिखाई दे रहे हैं. प्रदेश में करीब 17 लाख युवा वोटर हैं, जिनकी भूमिका सरकार बनाने और बिगाड़ने में निर्णायक मानी जा रही है. यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी चुनावी रणनीति में युवाओं को सबसे ऊपर रखा है. राहुल गांधी के छात्र संवाद से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के युवा अग्निवीर संवाद तक, दोनों प्रमुख दल युवाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
उत्तराखंड के कुल मतदाताओं में युवाओं की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है. इनमें 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाता सबसे बड़ी संख्या में हैं. यही वर्ग आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है. राजनीतिक दलों का मानना है कि यदि युवा मतदाताओं का भरोसा जीत लिया जाए तो चुनावी जीत का रास्ता काफी आसान हो सकता है. इसी कारण अब चुनावी सभाओं और अभियानों में युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है.
कांग्रेस ने युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए अलग रणनीति अपनाई है. राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए पार्टी सीधे विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से संवाद कर रही है. कांग्रेस बेरोजगारी, पेपर लीक, सरकारी नौकरियों और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है. पार्टी का मानना है कि इन विषयों पर युवाओं की चिंता को समझकर उनका समर्थन हासिल किया जा सकता है.
भाजपा युवाओं के बीच अपनी सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से रख रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार युवा अग्निवीर संवाद और जन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं से संपर्क कर रहे हैं. सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, सख्त नकल विरोधी कानून, नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई और बिना पर्ची बिना खर्ची के 34 हजार सरकारी नौकरियां देने को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है. इसके साथ ही भाजपा कांग्रेस सरकार के समय भर्ती से जुड़े विवादों का जिक्र कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश भी कर रही है.