नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है. जल संस्थान और जल निगम के छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं जल संस्थान के एक अधिशासी अभियंता को चेतावनी जारी की गई है. क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 400 से अधिक लोग बीमार हुए थे और दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था.
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने सोमवार को तीन इंजीनियरों के निलंबन के आदेश जारी किए. इनमें हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता नैनीताल मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रविंद्र शामिल हैं.
वहीं अधिशासी अभियंता नैनीताल अनीश एम पिल्लई को मामले में लापरवाही के लिए चेतावनी जारी की गई है. अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति और उससे बीमारी फैलने के मामले में की गई है.
जल संस्थान के बाद जल निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई. जल निगम के एमडी रणवीर सिंह चौहान ने प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह को निलंबित करने के आदेश दिए. इसके अलावा मुख्य अभियंता संजय सिंह ने प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्य और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु के निलंबन के आदेश जारी किए.
बताया गया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई. 22 अगस्त को जिला योजना और विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान संबंधित इंजीनियरों ने पेयजल लाइन के विभागीय होने को लेकर गलत जानकारी दी थी.
ज्योलीकोट क्षेत्र में 20 जून से जलजनित बीमारी फैलने की जानकारी सामने आई थी. पीलिया और डायरिया की चपेट में आने से 400 से अधिक लोग बीमार हुए, जबकि दो लोगों की मौत हो गई. दूषित पेयजल की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया था.
मामले का नैनीताल हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए. घर-घर सर्वे के साथ रक्त और पानी के नमूनों की जांच कराई गई. पेयजल स्रोतों में क्लोरीनेशन, टैंकों की सफाई और टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति जैसे कदम भी उठाए गए.
दूषित पेयजल के मामले में रवि बिष्ट की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों ने जल स्रोतों की सफाई और पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपलिंग को गंभीरता से नहीं लिया.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि ज्योलीकोट में बीमारी फैलने की जानकारी मिलने के बावजूद अधिकारियों ने समय पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की. इसके अलावा जल निगम के अधिकारियों पर संबंधित पेयजल लाइन को विभागीय मानने से इनकार करने का आरोप भी लगा था.