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सिर्फ एक दिन ने छीन लिया सरकारी नौकरी का मौका, उम्र सीमा में फंसा पुलिस भर्ती अभ्यर्थी का मामला

उत्तराखंड पुलिस आरक्षी भर्ती 2024 में हरिद्वार के एक अभ्यर्थी को आयु सीमा से महज एक दिन अधिक होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया. मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान भर्ती नियमों के अनुसार आयु निर्धारण की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट की गई.

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Edited By: Shanu Sharma
सिर्फ एक दिन ने छीन लिया सरकारी नौकरी का मौका, उम्र सीमा में फंसा पुलिस भर्ती अभ्यर्थी का मामला
Courtesy: AI

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उम्र का हर दिन कितना अहम होता है, इसका एक अनोखा मामला उत्तराखंड से सामने आया है. हरिद्वार निवासी एक अभ्यर्थी का पुलिस भर्ती में चयन केवल इसलिए नहीं हो सका क्योंकि भर्ती नियमों के अनुसार उसकी आयु अधिकतम सीमा से एक दिन अधिक मानी गई.

यह मामला बाद में राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान पूरी स्थिति सामने आई. हरिद्वार निवासी आकाश कुमार ने उत्तराखंड पुलिस आरक्षी भर्ती 2024 के लिए आवेदन किया था. हालांकि भर्ती के  दौरान उन्हे अयोग्य घोषित कर दिया गया.

क्या है पूरा मामला?

आकाश कुमार का कहना था कि उनकी उम्र निर्धारित अधिकतम सीमा 22 वर्ष से अधिक नहीं है, इसलिए उन्हें भर्ती से बाहर करना उचित नहीं है. उन्होंने आयोग के इस निर्णय पर आपत्ति जताई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आयु निर्धारण से जुडी जानकारी मांगी. जब सूचना मांगने के बाद भी अभ्यर्थी को स्पष्ट उत्तर नहीं मिला तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की. मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान भर्ती नियमों और आयु गणना की प्रक्रिया का विस्तार से परीक्षण किया गया.

जन्म तिथि बनी विवाद की वजह

सुनवाई में सामने आया कि उत्तराखंड पुलिस आरक्षी भर्ती 2024 के लिए अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 22 वर्ष निर्धारित की गई थी. नियमों के अनुसार एक जुलाई को अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए और अधिकतम आयु निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए. रिकार्ड के अनुसार आकाश कुमार की जन्म तिथि एक जुलाई 2002 है. भर्ती नियमों के आधार पर की गई आयु गणना में उनकी उम्र अधिकतम सीमा से एक दिन अधिक मानी गई. इसी आधार पर उन्हें भर्ती प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित किया गया.

यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि सरकारी भर्तियों में आयु सीमा से जुडा एक दिन भी अभ्यर्थी के भविष्य पर गहरा असर डाल सकता है. मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी ने सुनवाई के दौरान कहा कि अपीलकर्ता को मांगी गई सूचना उपलब्ध करा दी गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी को अब भी लगता है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है तो वह उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के समक्ष अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं. आयोग ने यह भी संकेत दिया कि भर्ती नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई संबंधित भर्ती संस्था के स्तर पर ही संभव होगी.