नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है. नैनीताल घूमकर वापस लौट रहे उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी पर्यटकों से भरा एक टेंपो ट्रैवलर कालाढूंगी के पास गहरी खाई में गिर गया. इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि बच्चों समेत 20 से अधिक लोग घायल हो गए. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया. जानकारी के अनुसार मेरठ के एक ही परिवार के 28 लोग नैनीताल घूमने के बाद वापस लौट रहे थे. बुधवार शाम करीब आठ बजे कालाढूंगी नगर से लगभग एक किलोमीटर पहले एक मोड़ पर टेंपो ट्रैवलर अचानक अनियंत्रित हो गया और करीब 30 मीटर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे के बाद वाहन में सवार लोगों की चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग, राहगीर और पुलिस मौके पर पहुंची. सभी ने मिलकर तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया.
खाई में गिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर मदद की. करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसके बाद निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हल्द्वानी रेफर कर दिया गया.
घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक साथ बड़ी संख्या में घायल पहुंचने से स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खुल गई. पांच बेड वाले अस्पताल में 20 से अधिक घायल पहुंचने के कारण इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ा. घायलों और उनके परिजनों को एंबुलेंस के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. कई लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिली, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों में नाराजगी देखने को मिली. बाद में अन्य स्थानों से एंबुलेंस बुलाकर घायलों को हल्द्वानी भेजा गया.
हादसे के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि टेंपो ट्रैवलर में क्षमता से अधिक यात्रियों को कैसे बैठाया गया. बताया जा रहा है कि वाहन में बच्चों सहित 28 लोग सवार थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि नैनीताल और कालाढूंगी मार्ग पर पुलिस चौकियां मौजूद होने के बावजूद वाहन को कहीं नहीं रोका गया. यदि समय रहते ओवरलोडिंग पर कार्रवाई की जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था.
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. प्रशासन की ओर से घायलों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया है. वहीं हादसे के कारणों और वाहन में सवारियों की संख्या को लेकर भी जांच की जा रही है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर यातायात सुरक्षा और ओवरलोडिंग के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है.