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दिन में पार्किंग की ड्यूटी, शाम को MMA की ट्रेनिंग... उत्तराखंड के गोल्ड मेडलिस्ट फाइटर का संघर्ष जीत रहा दिल

उत्तराखंड के राष्ट्रीय स्तर के एमएमए फाइटर वीरेंद्र सिंह का संघर्ष लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद वह अपनी ट्रेनिंग और डाइट का खर्च निकालने के लिए शादी समारोहों में पार्किंग ड्यूटी करते हैं.

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Edited By: Babli Rautela
दिन में पार्किंग की ड्यूटी, शाम को MMA की ट्रेनिंग... उत्तराखंड के गोल्ड मेडलिस्ट फाइटर का संघर्ष जीत रहा दिल
Courtesy: AI

सपने बड़े हों तो हालात भी उन्हें रोक नहीं पाते. उत्तराखंड के राष्ट्रीय स्तर के एमएमए फाइटर वीरेंद्र सिंह की कहानी इसी बात की मिसाल है. कई गोल्ड मेडल जीत चुके इस खिलाड़ी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह देहरादून के एक शादी समारोह में सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी पहनकर गाड़ियों की पार्किंग कराते नजर आ रहे हैं. पहली नजर में लोग उन्हें सामान्य गार्ड समझ बैठे, लेकिन जब उनकी असली पहचान सामने आई तो हर कोई उनकी मेहनत और संघर्ष की सराहना करने लगा.

दिहाड़ी पर करना पड़ा रहा है काम

26 वर्षीय वीरेंद्र सिंह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के चिन्खाली गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई एमएमए प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. इसके बावजूद आर्थिक तंगी के कारण उन्हें शादी समारोहों और आयोजनों में पार्किंग ड्यूटी करनी पड़ती है. इस काम के बदले उन्हें करीब 500 रुपए प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलती है, जिससे वह अपनी ट्रेनिंग और डाइट का खर्च पूरा करते हैं.

हर महीने 20 हजार रुपए का खर्च

वीरेंद्र बताते हैं कि एमएमए ऐसा खेल है जिसमें केवल मेहनत ही नहीं बल्कि अच्छी डाइट, नियमित ट्रेनिंग, जिम फीस, फाइट गियर, सप्लीमेंट और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी काफी पैसा खर्च करना पड़ता है. इन सभी जरूरतों पर हर महीने करीब 20 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं.

परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े इसलिए उन्होंने खुद कमाकर अपने सपनों को आगे बढ़ाने का फैसला किया. दिन में काम और शाम को कई घंटों की कड़ी ट्रेनिंग उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है.

गांव से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सपना

वीरेंद्र सिंह के पिता त्रिलोक सिंह सशस्त्र सीमा बल में कार्यरत हैं जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया. शुरुआत में वीरेंद्र ने बॉक्सिंग में जिला और राज्य स्तर पर कई गोल्ड मेडल जीते. बाद में अंतरराष्ट्रीय एमएमए फाइटर अंगद बिष्ट से प्रेरित होकर उन्होंने प्रोफेशनल एमएमए में कदम रखा. साल 2024 से वह देहरादून की म्यूटेंट एमएमए एकेडमी में लगातार ट्रेनिंग कर रहे हैं और बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा कि देश में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण संघर्ष कर रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने वीरेंद्र की हिम्मत और मेहनत की तारीफ की. कई लोगों ने खिलाड़ियों को बेहतर आर्थिक सहायता और सुविधाएं देने की मांग भी उठाई.