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खटीमा: सनातन धर्म की ओर लौटे थारू आदिवासी, सात परिवारों के 50 लोगों ने छोड़ा ईसाई धर्म

उत्तराखंड के खटीमा स्थित ग्राम नदन्ना में खुशी की एक बड़ी खबर आई है. थारू जनजाति के सात परिवारों के करीब 50 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापसी कर ली है. इन लोगों ने शुद्धिकरण हवन-यज्ञ के बाद कलावा बांधा, जनेऊ धारण की और हिंदू रीति-रिवाजों को फिर से अपनाया.

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Edited By: Antima Pal
खटीमा: सनातन धर्म की ओर लौटे थारू आदिवासी, सात परिवारों के 50 लोगों ने छोड़ा ईसाई धर्म
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खटीमा: उत्तराखंड के खटीमा स्थित ग्राम नदन्ना में खुशी की एक बड़ी खबर आई है. थारू जनजाति के सात परिवारों के करीब 50 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापसी कर ली है. इन लोगों ने शुद्धिकरण हवन-यज्ञ के बाद कलावा बांधा, जनेऊ धारण की और हिंदू रीति-रिवाजों को फिर से अपनाया.

ग्राम प्रधान माया जोशी ने बताया कि ये सात परिवार पहले कुछ लोगों के प्रभाव में आकर ईसाई धर्म में चले गए थे. उन्होंने नियमित प्रार्थना सभाओं में जाना शुरू कर दिया था, ईसाई पुस्तकें पढ़ने लगे थे और गले में क्रॉस भी पहन लिया था. हिंदू देवी-देवताओं की पूजा, टीका-चंदन लगाना और प्रसाद ग्रहण करना सब बंद कर दिया था. लेकिन अब इन्होंने अपनी भूल मान ली है और वापस अपनी जड़ों यानी सनातन धर्म में लौट आए हैं.

शुद्धिकरण संस्कार संपन्न

इस मौके पर गांव के शिव मंदिर में पंडित हरीश चंद्र जोशी की देखरेख में विशेष शुद्धिकरण हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया. गणेश वंदना के बाद इन सभी लोगों को कलावा बांधा गया, जनेऊ पहनाई गई, चंदन लगाया गया और चरणामृत व प्रसाद दिया गया. लोगों ने ईसाई धर्म से जुड़े क्रॉस और पुस्तकें खुद ही अलग कर दीं.

इस दौरान पूर्व प्रधान रामकिशोर राणा, राम सिंह जेठी, अनमोल सिंह, पूरन जोशी, भरत सिंह खड़का, भूपाल चंद, दीपक अधिकारी समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे.

आठ दिनों में 203 लोग लौटे

बताया जा रहा है कि पिछले आठ दिनों में खटीमा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से कुल 203 लोग ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापस आए हैं. इस बार नदन्ना गांव के सात परिवार इस सूची में शामिल हुए हैं.थारू समाज के ये लोग मूल रूप से सनातन परंपराओं से जुड़े रहे हैं. कई वर्ष पहले कुछ बाहरी प्रभावों और प्रलोभनों के कारण कुछ परिवार ईसाई धर्म की ओर चले गए थे. अब गांव में जागरूकता बढ़ने और अपनी संस्कृति के प्रति लगाव के कारण ये लोग वापसी कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों ने इस वापसी का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ना हर व्यक्ति का अधिकार है और संस्कृति की रक्षा करना बहुत जरूरी है. गांव में इस घटना से सकारात्मक माहौल बना हुआ है.